यादें- गावसकर से उलझकर टीम से बाहर हुए थे कपिल
नई दिल्ली। आज क्रिकेटर करोड़ों में खेलते हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब चंद हजार रुपए की राशि के लिए भारतीय क्रिकेट के दो बड़ेदिग्गज सुनील गावसकर और कपिलदेव भिड़ पड़े थे। इस लड़ाई के कारण कपिल को एक बार टेस्ट टीम से बाहर होना पड़ा था।
गावसकर और कपिलदेव के बीच इस टकराव ने एक बार तो भारतीय क्रिकेट में भूचाल ला दिया था। यह मामला नवंबर 1984 का है। तब वाराणसी में हुए सिंगल विकेट टूर्नामेंट के दौरान पुरस्कार राशि को लेकर गावसकर और कपिल में इस कदर ठनी कि उसका अंजाम कपिल को डेविड गॉवर की इंग्लैंड टीम के खिलाफ तीसरे टेस्ट से बाहर होकर भुगतना पड़ा।
प्रसिद्ध खेल पत्रकार पदमपति शर्मा ने अपनी किताब ‘खेल पत्रकारिता’ में इस घटना का उल्लेख किया है। पदमपति ने इस घटना का उल्लेख करते हुए लिखा है कि गावसकर ने इस टूर्नामेंट के लिए 16 और 17 नवंबर की तारीखें तय कर रखी थी। गावसकर ने दिलीप वेंगसरकर, कपिल देव,संदीप पाटिल, मोहिंदर अमरनाथ, रवि शास्त्री, मदन लाल, चेतन चौहान और यशपाल शर्मा सहित दस नाम छांट रखे थे और सभी की राशि भी उन्होंने तय कर रखी थी। इसमें सर्वाधिक दस हजार रुपए गावसकर को मिलने थे और उसके बाद सात हजार रु. की दूसरी सबसे बड़ी धनराशि कपिल को मिलनी थी।
उन दिनों एक वनडे खेलने के लिए खिलाड़ियों को मात्र 1500 रुपए मिला करते थे। निर्धारित तिथि तक सभी खिलाड़ी वाराणसी पहुंच चुके थे। लेखक ने अपनी किताब में लिखा है ‘पहला दिन तो शांति से गुजर गया मगर शाम को वह हुआ जिसकी कल्पना नहीं की गई थी। आयोजन समिति के एक सदस्य ने नशे में मोहिंदर अमरनाथ को कह दिया कि गावसकर को अलग से 40 हजार रुपए दिए गए हैं। बस फिर क्या था मामले ने तूल पकड़ लिया।
खिलाड़ी जिस पांच सितारा होटल में ठहरे थे वहां उनके सम्मान में एक समारोह चल रहा था लेकिन तभी उसमें रंग में भंग पड़ गया। कपिल 40 हजार की बात सुनकर बिफर उठे और उन्होंने होटल के महाप्रबंधक और गावसकर के दोस्त के साथ काफी बहसबाजी की। पदमपति ने लिखा है ‘दूसरे दिन एयरपोर्ट में भी कपिल व गावसकर में कुछ अप्रिय नोकझोंक हुई।
मुंबई के अखबारों में यह विवाद सुर्खियों में छपा। टीम दो खेमों में बंट चुकी थी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जांच की घोषणा कर दी। जांच में पता चला कि गावसकर ने 40 हजार नहीं 10 हजार रु. ही लिए थे लेकिन कपिल ने जो बुरा वर्ताव किया था उससे दोनों महारथियों के बीच दोस्ती में दरार पड़ गई। उसके बाद दिल्ली टेस्ट में कपिल ने जब पैट पोकाक की गेंद पर लापरवाही भरा शॉट मारा तो अपना विकेट फेंक देने के कथित आरोप में कपिल और संदीप पाटिल दोनों को अगले टेस्ट के लिए टीम से बाहर कर दिया गया।
कपिल के लिए अगले टेस्ट से बाहर होना मानो वज्रपात था। इस महान हरफनमौला का लगातार बिना किसी ब्रेक के देश की ओर से खेलने का सपना कोलकाता टेस्ट से बाहर बैठाने के साथ ही चकनाचूर हो गया। बाद में तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष एन के पी साल्वे तीसरे टेस्ट के बाद गावसकर और कपिल को नागपुर बुलाकर आमने सामने बैठाया और दोनों में सुलह करा दी। यह सुलह तो हो गई लेकिन इस विवाद से भारतीय क्रिकेट को अपूरणीय क्षति हो चुकी थी और बरसों तक इन दोनों महारथियों के बीच हुए इस विवाद की छाया भारतीय क्रिकेट पर मंडराती रही।










