टिकटों में बसे बाल चित्र..
बाल भास्कर Saturday, August 15, 2009 13:28 [IST]  

childयहां तीन डाक टिकटों के चित्र प्रदर्शित हैं। ये तीनों डाक टिकट बच्चों को समर्पित हैं। इन पर अंकित चित्र भी बच्चों से ही सम्बंधित हैं। भारतीय डाक विभाग ने बाल दिन के अवसर पर इन्हें पहली बार 14 नवंबर 1957 को जारी किया था। ये तीनों 8,15 और 90 पैसे के हैं। वर्ष 2008 में ये 51 साल पूरे कर 52वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं।



लंबे जीवनकाल की दृष्टि से अब ये ऐतिहासिक महत्व के डाक टिकट हैं। कहते हैं कि पुराने डाक टिकट अधिक मूल्यवान होते हैं, ये भी पुराने हैं, इसलिए इनके पास आज के बच्चों को देने के लिए ज्ञान का उपयोगी भंडार है।



तीनों डाक टिकटों में जो चित्र छपे हैं, उनमें आज के बच्चों और उनके पालकों के लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी संदेश है। पहला आठ पैसे वाला टिकट गुलाबी-बैगनी रंग में छपा है। इसमें एक बच्चे को केला खाते हुए दिखाया गया है। केला और अन्य सभी फल स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।



इनके उचित मात्रा में नियमित सेवन से बच्चों का स्वस्थ विकास होता है, इसलिए बच्चों के दैनिक आहार में फलों को भी शामिल किया जाना चाहिए।



दूसरा पंद्रह पैसे वाला टिकट नीले-हरे रंग में छपा है। इसमें एक नन्ही-मुन्नी बच्ची को स्लेट-पट्टी पर लिखते दिखाया है। यह टिकट बच्चों की पढ़ाई पर Êाोर देता है। मानसिक विकास के लिए यह Êारूरी भी है। आज के बच्चे कल के भारत भाग्यविधाता हैं। उत्तम शिक्षा ही उनमें अच्छे संस्कार देने और अच्छा नागरिक बनने में मदद करती।



तीसरा नब्बे पैसे वाला टिकट नारंगी भूरे रंग में छपा है। इसमंे खिलौने के रूप में एक घोड़े का चित्र छपा है। यह चित्र बताता है कि बच्चों को खिलौने प्रिय होते हैं।



खिलौनों से खेलने से स्वस्थ मनोरंजन के साथ स्वस्थ शारीरिक व मानसिक विकास होता है, इसलिए बच्चों को खेलने के लिए खिलौने Êारूर दिए जाने चाहिए। इस तरह बाल दिन के ये प्रथम डाक टिकट बच्चों के स्वस्थ विकास की कामना के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहते की प्रेरणा देते हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना भी करते हैं।



बलराम गुप्त, करगीरोड, बिलासपुर

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