पैर शरीर का वह हिस्सा हैं जो दिन में कम से कम दस घंटे जूते, सैंडल या मोजे में बंद रहते हैं। लंबे समय बंद होने के कारण मौसम की उमस और नमी का भी यह सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। इन्हें फंगल संक्रमण, एथलीट फुट और कुछ दूसरे रोगों से बचाने के लिए कुछ बातें जान लेना जरूरी हैं।
याद कीजिए कि ऑफिस या थकान से घर लौटकर पैर धोते हैं तो एकदम से तरोताजा महसूस करते हैं। यह इशारा है कि पैर का दिमाग से गहरा ताल्लुक है। पूरे शरीर का वजन उठाने वाले इन पैरों को खुश रखना जरूरी है, आप थोड़ी सी समझदारी और तौर-तरीकों में फेरबदल करके पैरों को कई तरह के संक्रमण से बचा सकते हैं।
सही फुटवियर
हमेशा ऐसा फुटवियर पसंद करें जो आपको फिट हो यानी न तो बेहद ढीला और न ही एकदम टाइट। बंद और टाइट जूतों से पैर में पसीना आता है और यहीं से बीमारियों की शुरुआत होती है। अगर आप स्नीकर्स या जूते पहन रहे हैं तो ज्यादा लंबे समय तक इन्हंे न पहनें।
आखिर पैरों को भी सांस लेने की जरूरत होती है। इस मामले में फ्लिप-फ्लॉप्स सबसे ज्यादा फायदे की हैं, यह पसीने को तुरंत सूखने का मौका देती हैं। सैंडल्स में यह ध्यान देना जरूरी है कि इसके स्ट्रैप्स फोम के न हों, वरना यह सूखते देर से हैं।
मोजे का चुनाव
पैरों को साफ और स्वच्छ रखने में मोजे सबसे ज्यादा मदद करते हैं। बेहद छोटे, ज्यादा बड़े या ढीले मोजे पैरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ कम क्वालिटी के रंगीन मोजे भी पैरों को संक्रमण की सौगात दे जाते हैं, जानकार ज्यादातर ऊनी या कॉटन के मोजे पहनने की सलाह देते हैं।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि सिंथेटिक और नायलॉन के मोजे कभी न पहनें, यह पैरों को सांस लेने का मौका नहीं देते।
पैरों को स्वस्थ रखने के लिए
दफ्तर, बाजार या घूम-फिरकर घर लौटने के बाद सबसे पहले अच्छी तरह पैर धोएं। अगर मुमकिन हो तो पाउडर लगाएं और कुछ देर के लिए छोटे स्टूल या टेबल पर रखें, जिससे रक्तसंचार अच्छा रहे। काम के दौरान जैसे ही मौका मिले पैरों को कुछ देर के लिए खुला छोड़ दें। जिन जगहों पर जूते पहनना जरूरी न हो वहां सैंडल्स पहनकर ही काम चलाएं। अगर पैरों का इतना ध्यान रखा जाए तो वह आपको शुक्रिया जरूर कहेंगे।