उज्जैन। अगले महीने आसमान में अद्भुत नजारा बनने जा रहा है। सौरमंडल के सबसे सुंदर ग्रह शनि के वलय (रिंग) एक सीध में दिखाई देंगे। ऐसा लगेगा मानो गोलाकार पिंड में एक छड़ किसी ने जड़ दी हो। १४ साल के लंबे अंतराल बाद यह स्थिति बनने जा रही है। जिसे देखने के लिए खगोलप्रेमी बेताब हैं। यह नजारा वेद्यशाला या विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में टेलीस्कोप से देखा जा सकता है। १६ साल के लंबे इंतजार बाद यह स्थिति पुन: बनेगी।
शनि अपनी कक्षा में चक्कर लगाते हुए धीरे-धीरे ऐसी स्थिति में पहुंच रहा है जब इसके वलय एक पतली छड़ के समान दिखाई देंगे। जिससे शनि का एक अलग रूप खगोलप्रेमियों को देखने को मिलेगा। खगोलविद् और मप्र पाठ्यपुस्तक निगम की भूगोल की पुस्तकों के लेखक डॉ. राजेंद्र सक्सेना के मुताबिक १९९५ के बाद यह स्थिति बनने जा रही है। शनि को इस रूप में २क् से २३ सितंबर तक देखा जा सकेगा। तब मौसम भी साफ रहेगा। हालांकि यह सामान्य खगोलीय घटना है लेकिन खगोलविदें के लिए यह रोमांचक है।
कुछ खगोलप्रेमी इस स्थिति में पृथ्वी पर होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन भी करेंगे। इसकी वजह यह भी है कि शनि की यह स्थिति २क्२५ में दोबारा बनेगी। सूर्य, पृथ्वी और शनि भी एक सीध में: इस स्थिति में सूर्य पृथ्वी और शनि एक सीध में रहते हैं। पृथ्वी विषुवत रेखा में सूर्य के सामने सीधी हो जाती है। ठीक इसी तरह से शनि की विषुवत रेखा भी सीध में हो जाएगी। शनि की विषुवत रेखा और वलय एक सीध में होंगे। जिससे शनि के वलय सीधी छड़ के रूप में दिखेंगे।
दिन-रात बराबर भी: जिस समय शनि के वलय एक सीध में दिखाई देंगे उसी दौरान २३ सितंबर को धरती पर दिन और रात बराबर दिखेंगे। यानी दिन और रात की अवधि बराबर रहेगी।
वलयों के कारण खूबसूरत दिखता है शनि
सौरमंडल में चार ग्रह- शनि, बृहस्पति, यूरेनस और नेप्च्यून ऐसे हैं जिनकी वलय हैं। इनमें भी सबसे स्पष्ट शनि की वलय दिखाई देते हैं। ठ्ठ ६१क् में गैलिलियो ने शनि की वलय देखी थी। ठ्ठ शनि के सात वलय हैं। जिनका रंग हलका पीला चमकदार है। इनके कारण ही शनि सौरमंडल का सबसे सुंदर ग्रह है। ठ्ठ वलय की मोटाई १क् मीटर है और ये बर्फ कण से बने हुए हैं। ठ्ठ वलय की चौड़ाई ४ लाख ८क् हजार किलोमीटर है जिसमें कई पृथ्वियां समा सकती हैं। ठ्ठ वलय का रंग हलका पीला चमकदार दिखाई देता है।
एक नजर में शनि
शनि गैसीय ग्रह है। जिसमें हीलियम और हाइड्रोजन गैस भरी हैं।
सूर्य से इसकी औसत दूरी १४२७ मिलियन किलोमीटर है।
इसकी गति ९.६ किलोमीटर प्रति सेकंड है।
यह सूर्य की परिक्रमा साढ़े उनतीस साल में करता है यानी इसका एक वर्ष साढ़े उनतीस साल का।
अपने अक्ष पर यह १क् घंटे १४ मिनट में एक चक्कर पूरा कर लेता है।