आजादी का उत्सव
रुपहले परदे पर विभिन्न किरदार निभाने वाले, फिल्म बनाने वाले या गीतों को संजोने वाले कलाकारों के प्रति भारतीय दर्शकों के मन में खास भावनाएं हैं। ये कलाकार आम जनता के स्टाइल ऑइकन के रूप में उनके दिलों में बसे रहते हैं। आजादी के इस खास दिन पर जानते हैं प्रिय सितारों के बारे में कि उनके लिए आजादी के क्या मायने हैं।
मेरे देश की धरती..सोना उगले उगले हीरे मोती.. मेरे देश की धरती.. गुलशन बावरा ने जितनी शिद्दत से इन पंक्तियों को लिखा था उतनी ही गरिमा से इस गाने को सिल्वर स्क्रीन पर भारत कुमार यानी मनोज कुमार ने प्रस्तुत भी किया था। हमारी इस पीढ़ी में आज वे लोग अंगुलियों पर गिने जाने की स्थिति में बचे हैं जिन्होंने 15 अगस्त 1947 का वो स्वर्णिम और यादगार दिन देखा था। आधी रात के बाद रोशन हुई आजाद हिंदुस्ता की सरजमीं की सौंधी महक आज भी कहीं न कहीं उस दौर में मौजूद लोगों के अनुभव के रूप में परिवारों में जिंदा है। इसके अतिरिक्त कहीं हम आजादी के उस मंजर को महसूस कर पाते हैं तो वो है बॉलीवुड का सिल्वर स्क्रीन। मनोज कुमार हों या आशुतोष गोवारीकर सभी ने निराले अंदाज में आजादी की दास्तान को दर्शकों के मानस-पटल पर उतारा है।
नई पीढ़ी ने इतिहास को पढ़ने के साथ रुपहले परदे पर देख कर उस दर्द को समझा है जो महात्मा गांधी की अंहिसा के पीछे छिपा था। वो जज्बा जो भगतसिंह या राजगुरु में इस मातृभूमि के प्रति था। अंग्रेज सरकार ने काला पानी की सजा हो या तोप के मुंह पर बांधकर स्वतंत्रता सैनानियों के परखच्चे उड़ा देने की सजा हो। अनगिनत जुल्म एक सदी तक आजादी के मतवालों पर ढाए हैं। उसे सुनकर रूह कांप जाती है। ऐसे ही दिल को दहला देने वाले दृश्य रुपहले परदे पर आते ही सैकड़ों आंखों को नम कर देते हैं। फांसी चढ़े और शहीद हुए कई सेनानियों का किरदार निभाने वाले कलाकारों के सम्मान में भी हिंदुस्तानी दर्शकों ने उतने की सम्मान के साथ अपना मस्तक झुकाया है।
परदे पर विभिन्न किरदार को निभाने वाले सिने कलाकार कहीं न कहीं आम जनता के दिलों में रोल मॉडल की तरह छाए रहते हैं। इनकी अदाकारी के कायल होने के साथ ही दर्शक इनकी खास अदाओं को भी अपना कर जीवन में ऊंचाइयां हासिल करना चाहते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर नई पीढ़ी के सपनों के भागीदार हिंदी सिनेमा के कुछ खास कलाकारों ने शअर की अपने मन की बात। भारत की आजाद फिजाओं में खुली सांसें ले रहे देशवासियों को आजादी के अपने मायने बता रहे हैं ये कलाकार।
हिदायतों का न होना ही आजादी
हिंदी फिल्मों को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने वाले कपूर परिवार की चौथी पीढ़ी के कुमार है रनबीर कपूर। सांवरिया के रूप में बॉलीवुड में एंट्री लेने वाले रणबीर कपूर अब इस युग के युवाओं का मैनेजमेंट और भावनाएं बताने वाली फिल्में सेल्समैन रॉकेट सिंह व व्हाट्स-अप सिद के जरिये नए संदेश लेकर आ रहे हैं। आजादी के अपने मायने रनबीर कुछ इस तरह बताते हैं- जवान व्यक्ति सपने देखता है और सपने पूरे करने का अर्थ ही है आजादी। जवान व्यक्ति को अनुभव नहीं होने के कारण प्राय: टोका जाता है कि यह मत करो, वह मत करो। इन हिदायतों का न होना ही मेरे लिए आजादी है।
बेखौफ ख्यालों को बयां करना
थियेटर के बैकग्राउंड से आने वाले निर्देशक अजीज मिर्जा ने नवयुग में देशप्रेम की बात को जस्टीफाय करते हुए फिर भी दिल है हिंदुस्तानी जैसी फिल्म बनाई। धारावाहिक नुक्कड़ एक नई क्रांति लाया। शाहरुख खान को स्थापित करने के साथ लीक से हटकर फिल्में बनाने का श्रेय उनके खाते में है। आजादी के मायने बताते हुए अजीज साहब कहते हैं- हर किस्म के खौफ से बच जाना ही मेरे लिए आजादी का असली मतलब है। अपने ख्यालों को बेखौफ हो कर बयां करना ही आजादी है।
मुक्त हों पराई निर्भरता से
इंदौर से मुंबई हीरो बनने की ख्वाहिश लेकर गए सलीम खान एक्टर नहीं बल्कि लेखक के रूप में स्थापित हो गए। सलीम खान और जावेद अख्तर की जोड़ी ने एंग्री यंगमैन की छवि वाले अमिताभ को पटकथाओं के जरिये सुपर हिट किया। इस जोड़ी ने कुल 21 फिल्में लिखीं जिनमें से 19 सुपर-डुपर हिट रहीं। सलीम साहब के लिए आजादी के मायने जीवन के अनुभवों से जुड़े हुए हैं। वे कहते हैं-
मेरे लिए आजादी के मायने हैं कि कोई पाबंदी नहीं हो। मैं अपनी मर्जी से अपने घर से महीनों बाहर नहीं निकलता परंतु बाहर निकलने पर पाबंदी मुझे पसंद नहीं। आजादी के मायने समझने में मुझे जीसस क्राइस्ट की उक्ति ने मदद की है कि किसी आदमी को रोज मुफ्त में खाना मत दो, परंतु खाना-कमाना सिखाओ। रोजी रोटी कमाने की आजादी। प्रोफेट मोहम्मद ने भी फरमाया है कि सच्ची खैरात यह है कि आदमी को पराई निर्भरता से मुक्त करें। आर्थिक आजादी ही सबसे पहली चीज है।
जीवन में सबसे जरूरी है संतोष
संगीत निर्देशक रोशन के पुत्र राकेश रोशन ने औसत कलाकार के रूप में लगभग 25 से 30 फिल्मों में काम किया। निर्माता-निर्देशक के रूप में कुल ग्यारह फिल्में बनाई जिनमें से नौ सुपर हिट रही। अंग्रेजी फिल्मों में सदियों से स्थापित सुपर हीरो की तुलना में उन्होंने भारतीय हीरो कृष को तैयार किया। यही नहीं उसके भारतीय पहनावे व स्टंट के चलते यह इंडियन सुपर हीरो कृष विश्वभर में छा गया। राकेश रोशन के लिए आजादी है- जीवन में संतोष प्राप्त करने के खिलाफ कोई बंदिश और जंजीर न हो, यही मेरे लिए आजादी का मतलब है। मनुष्य के लालच का कोई अंत नहीं है, वैभव की कोई सीमा नहीं है, आप चाहें जितना भौतिक सुख पा लें उसका कोई अंत नहीं है। इसलिए सबसे अधिक जरूरी है संतोष।
आजादी अभिव्यक्ति की
फिल्मों के एक नए दौर और अपनी खास शैली के नृत्य के लिए पहचानी जाने वाली श्रीदेवी के लिए स्वतंत्र भारत में भाव-अभिव्यक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। किशोरावस्था से ही फिल्मों में काम कर रहीं श्रीदेवी ने अपने आस-पास रुपहले रंगों के साथ गहरे रंग भी देखे हैं। वे कहती हैं स्वतंत्र भारत ने ही महिलाओं को आगे बढ़ने का अधिकार दिया है। वे कहती हैं 15 अगस्त 1947 की फिल्म चल रही है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आजाद भारत में दिए पहले भाषण में में नए भारत के गठन की बात कही थी। पिछले 62 वर्ष से लगातार तरक्की की राह पर अग्रसर भारत में कई बदलाव आए हैं। घर में चूल्हे-चक्की के काम में डूबी रहने वाली महिलाओं ने देश की कमान तक संभाली है।
नभ-जल-थल में कोई ऐसा स्थान नहीं बचा जहां महिलाओं ने अपना वर्चस्व न कायम किया हो। शिक्षा हो या तकनीक विश्वभर में हमारे देश का नाम सम्मान से लिया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि सात परदों में छिप कर रहने वाली औरत आज बड़े पदों पर आसीन होने के साथ घर में भी मुखिया के रुप में जिम्मेदारियां निभा रही है। मेरे लिए खुद को अभिव्यक्त कर सकना ही सबसे बड़ी आजादी है।
हमने राष्ट्र को क्या दिया?
दिव्या भारती अभिनीत रंग के पटकथा लेखन से करियर शुरु करने वाले भोपाल के रुमी जाफरी ने कुली नं- वन, बीवी नं- वन जैसी कई हिट पटकथाएं लिखी हैं। फिल्म लाइफ पार्टनर के साथ उन्होंने डायरेक्शन के क्षेत्र में कदम रखा है। आजादी के मायनों को लेकर रुमी का कहना है- मौजूदा पीढ़ी को आजादी बिना किसी संघर्ष के मिल गई है, इसलिए उन्हें इसका महत्व समझ नहीं आता है। हर बात के लिए दूसरो पर दोषारोपण एक आदत सी बन गई है। ये पीढ़ी हर बार यह सवाल उठाती है कि राष्ट्र ने हमें क्या दिया? पर कोई ये बताए कि हमने राष्ट्र को क्या दिया।
अपनी बात कहने की आजादी
जाने तू या जाने ना फिल्म के साथ युवा दर्शकों की चहेती बनी जेनेलिया डिसूजा कहती हैं मुझे अपने भारतीय होने पर गर्व है। केवल एक दिन ही नहीं मैं हर दिन अपने राष्ट्र को सैल्यूट करती हूं। मेरे आजाद देश ने मुझे अपनी बात कहने के साथ एक आजाद जीवन जीने की अनुमति दी है। मैं न केवल कृतध्न हूं बल्कि मुझे अपने देश पर और यहां का वासी होने पर गर्व है। इस खास दिन पर हर भारतीय को एकजुट होकर साथ चलने की और भाईचारे की शपथ लेनी चाहिए।
खत्म हो निर्भरता
एक्टर जितेन्द्र से अदाकारी के गुण विरासत में पाने वाले तुषार कपूर के खाते में कोई बड़ी हिट फिल्म नहीं रही लेकिन अपने अभिनय के चलते वे हमेशा दर्शकों को एवरग्रीन फेवरेट बनते जा रहे हैं। तुषार कहते हैं आजादी के उत्सव पर आजाद सोच की शपथ हरेक को उठानी चाहिए। अपनी निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाने के साथ किसी पर निर्भर रहने के भाव को जड़ से खत्म कर दे। स्वयं को राष्ट्रएकता की भावना से लबरेज करना ही आजाद देश का सच्च उत्सव मनाना है।