भोपाल शहर की सड़कों के तो क्या कहने। अगर लिंक रोड नंबर एक और दो को छोड़ दें तो बाकी सड़कें तो ऐसी हैं कि रोज सफर करने वालों का खाना बिना किसी व्यायाम के ही पच जाए। चाहे कुछ साले पहले बना भदभदा का नया पुल और रोड हो या फिर नेहरू नगर की सड़कें। यहां पर गाड़ी चलाने वालों को गड्ढों से बचकर चलना पड़ता है। क्योंकि बारिश होते ही इनमें पानी भर जाता है और फिर कोई भी दोपहिया चालक इसमें गिरकर सकता है।
इतना ही नहीं स्पीड ब्रेकर भी इतने बुरे आकार के बने हैं कि चार पहिया वाहनों की बॉडी उसमें से गुजरते वक्त रगड़ तो खा ही जाती है और दोपहिया वाहन वालों को काफी संतुलन बनाकर निकलना पड़ता है। अगर प्रदेश के की राजधानी के यह हालात हैं तो बाकी शहर तो भगवान भरोसे ही होंगे।
तुषार कांति, नेहरू नगर, भोपाल