मुंबई. कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन की गैस के मुद्दे पर अंबानी बंधुओं में छिड़ी जंग अब ‘जनता की अदालत’ में पहुंच गई है। रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप ने सोमवार को कई अखबारों में विज्ञापन देकर जनता से ई-मेल और एसएमएस के जरिए उनकी राय मांगी है।
विज्ञापन में कहा गया है कि पेट्रोलियम मंत्रालय सरकारी ‘नवरत्न’ कंपनी एनपीटीसी पर दबाव डाल रही है कि वह रिलायंस इंडस्ट्रीज (मुकेश अंबानी की कंपनी) को केजी बेसिन की गैस की कीमत से 80 प्रतिशत ज्यादा का भुगतान करे।
उनका आरोप है कि ऐसा होने पर एनटीपीसी को 30 हजार करोड़ रुपये का घाटा होगा, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज को लगभग 50 हजार रुपये का ‘सुपर-नॉर्मल’ लाभ होगा। इससे सरकार को महज 500 करोड़ रुपये ही मिलेंगे। इसी मसले पर जनता से पूछा गया है कि क्या यह जनहित या राष्ट्रहित में है?