हिरोशिमा पर गिराए परमाणु बमों द्वारा मचाई तबाही के मंजर से दुनिया को रूबरू करवाने के लिए यहां पीस मेमोरियल पार्क बनाया गया है। इसके अलग-अलग हिस्से उस दुर्घटना के विभिन्न पहलुओं को समर्पित हैं..
पान के शहर हिरोशिमा पर 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने न्यूक्लियर बम गिराया था। इस हादसे में १,४क्,क्क्क् लोग मारे गए थे। इसके तीन दिन बाद 9 अगस्त को जापान के ही एक और शहर नागासाकी की हवा में भी परमाणु बम का Êाहर घुल गया।
हौंसले की जीत- न्यूक्लियर बम की तबाही से ये शहर पूरी तरह उबर चुके हैं। आज ये पूरी तरह विकसित शहर हैं। तबाही को चुनौती मानने वाला यह देश आज सबसे हाईटेक देश है।
पीस मेमोरियल पार्क-हिरोशिमा पीस मेमोरियल पार्क बनाने का मक़सद न सिर्फ़ न्यूक्लियर बम हमले में मारे गए लोगों को याद करना है, बल्कि परमाणु बम के आतंक के बारे में लोगों को बताना और शांति का संदेश देना है।
ए-बॉम्ब डोम- हमले से पहले यह इंडस्ट्रियल प्रमोशन हॉल था। बम इसी इमारत के ऊपर गिरा था। यह इमारत उसी हालत में सहेज कर रखी गई है जैसी वह हमले के तुरंत बाद हो गई थी।
द चिल्ड्रन पीस मॉन्युमेंट-द चिल्ड्रन पीस मॉन्युमेंट एक स्टेच्यु है, जो उन बच्चों को समर्पित है जो एटमी हमले में मारे गए थे। यह बुत जापानी लड़की सडाको सासाकी से प्रेरित होकर बनाया गया है जो बम की रेडिएशन का शिकार हो गई थी।
पीस मेमोरियल हॉल-ज़मीन के अंदर बने इस हॉल में एक घड़ी है, जिसे 8:15 का समय डालकर बंद कर दिया गया है। इसी समय यहां बम गिरा था।
टीला-यहां घास से ढंका एक बड़ा टीला है, जिसमें 70,000 ऐसे लोगों की राख है, जिनकी पहचान भी नहीं हो पाई थी।
पीस-फ्लेम१९६४ में जलाई गई यह ज्योति तब तक जलती रहेगी, जब तक पृथ्वी से सारे परमाणु बम नष्ट न हो जाएं और परमाणु हमले की आशंका से हमारा ग्रह मुक्त न हो जाए।
पीस बेल-यहां आने वाले पर्यटक पीस बेल को विश्वशांति की प्रार्थना के लिए बजाते हैं।
पीस गेट-इस स्मारक में छह गेट बनाए गए हैं। इन पर दुनिया की ४९ भाषाओं में ‘शांति’ लिखा हुआ है। -प्रदीप कुमार