"मेरा देश मेरा जीवन"
अडवानी की बहुप्रचारित आत्मकथा "मेरा देश मेरा जीवन" को तो उनके विरोधियों ने झूठ का पुलिंदा तक कह डाला . ये भी कहा गया की अडवानी ने घटनाओं और तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है . लेकिन ये किताब खूब लोकप्रिय रही और हिंदी,अंग्रेजी के बाद इसका उर्दू संस्करण भी लॉन्च हुआ.
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"मोहि कहाँ विश्राम"