रविवार को उसेन बोल्ट ने वल्र्ड एथलेटिक्स मीट में100 मीटर दौड़ में अपना ही रिकॉर्ड तोड़कर सबको अचंभित कर दिया और सोचने पर मजबूर कर दिया कि इंसान अपने शरीर से और कितना कुछ प्राप्त कर सकता है। सवाल है कि क्या हमने सबसे तेज दौड़ देख ली है या यह भी 1954 में धावक रोजर बैनिस्टर द्वारा चार मिनट में एक मील दौड़ने की तरह इंसान की एक ऐसी उपलब्धि है जिसे और बेहतर किया जा सकता है।
विज्ञान ने इसका जवाब शायद खोज लिया है। वैज्ञानिकों को यह लगता है कि हम इंसानी शरीर की अधिकतम क्षमता के अंत के बेहद करीब पहुंच चुके हैं पर मामला इससे भी ज्यादा रोचक होने वाला है अगर हम ऐसे एथलीट ढूंढते रहें जो ज्यादा मजबूत और ज्यादा उद्यमी हैं। 22 वर्ष की आयु में बोल्ट सोचते हैं कि वे इससे बेहतर कर सकते हैं। हालांकि बीजिंग ओलिंपिक के रिकॉर्ड से उन्होंने .11 सेकंड बचाए और 9.58 का विश्व रिकॉर्ड बनाया।
जीत के बाद बोल्ट ने कहा कि मेरे ख्याल से मैं 9.4 पर जाकर रुकूं गा। रिकॉर्ड टूटने से कई बार बड़े-बड़े विद्वान भी अचंभित हो जाते हैं। रोजर बेनिस्टर ने एक मील की दौड़ चार मिनट में पूरी की थी तब सब इससे कम समय निकालना असंभव बता रहे थे पर इसके बाद तोड़ने के लिए एथलीट जूनुनी हो गए और अब तक 1000 से ज्यादा इस रिकॉर्ड को तोड़ चुके हैं।
2060 के बाद नहीं बनेंगे विश्व रिकॉर्ड
लिवरपूल स्थित जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी की एप्लाइड स्पोर्ट्स एंड एक्सरसाइज साइंस के प्रोफेसर ग्रेग वाइट ने गणित के आधार पर पिछले वर्षो में बने एथलेटिक्स रिकॉर्डो का समीकरण कर भविष्य में बनने वाले रिकॉर्डो का अंदाजा लगाया। उन्होंने पाया है कि हम एक डैड एंड के करीब पहुंच चुके हैं। अब प्रदर्शनों में कोई बड़े बदलाव आने की गुंजाइश नहीं है। 1912 में 100 मीटर दौड़ का विश्व रिकॉर्ड 10.12 सेकंड का था और इस समय में ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।
वाइट की इस खोज को गत वर्ष फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स ने भी माना है। उनकी रिपोर्ट में लिखा है कि एथलीट 2060 तक रिकॉर्ड तोड़ने की गति प्राप्त कर लेंगे। यह निष्कर्ष 1896 की पहली आधुनिक ओलिंपिक के बाद बने 3260 विश्व रिकॉडों के आंकलन के बाद निकाला गया है। इसके अनुसार 1896में एथलीट अपनी क्षमता का 75 प्रतिशत इस्तेमाल कर रहे थे।
2008 में यह 99 प्रतिशत तक पहुंची, 2027 तक आधे प्रतिस्पर्धाओं के एथलीट 100 प्रतिशत प्राप्त कर लेंगे और 2060 तक सभी प्रतिस्पर्धाओं के एथलीट 100 प्रतिशत प्राप्त कर लेंगे। इसके बाद मिलीसेकंड का अंतर शायद इस खेल को और रोमांचक बना दे। पर इसके लिए खेल को अत्याधुनिक जूनुनी व औरों से हटकर शारीरिक क्षमता वाले एथलीटों पर निर्भर करना होगा। अमेरिकी तैराक माइकल फेल्प्स इसका एक शानदार उदाहरण है।
शुरू हो चुकी है खोज
कई देशों ने इन विशेष व्यक्तियों की खोज शुरू भी कर दी है। इंग्लैंड में यूके स्पोर्टिग जांयट एडंटीफिकेशन प्रोग्राम ऐसे लोगों की खोज में जुटा है। इस कार्यक्रम के तहत 16 से 25 वर्ष की आयु में 5.11 फुट की महिलाएं और 6.3 फुट के उपर के पुरुषों की खोज की जा रही है। 1981 में ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स की स्थापना की गई जिसमें 12 वर्ष की आयु से ही अत्याधुनिक तकनीकों से एथलीटों का परीक्षण शुरू किया।
हालांकि जेनेटिक परीक्षण की रोक है पर एआईएस इस पर काम करना चाहती है। विज्ञान कहता है कि बोल्ट और बेहतर कर सकते हैं। बीजिंग ओलिंपिक के बाद नॉर्वे के वैज्ञानिक हंस एरिक्सन ने कहा था कि बोल्ट अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए धीमे न होते तो वेओलिंपिक फाइनल में 9.55 का समय निकाल सकते थे।
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. मार्क डैनी के अनुसार मनुष्य 100 मीटर दौड़ को ज्यादा से ज्यादा 9.48 सेकंड में पूरा कर सकता है।सबकी अपनी-अपनी राय है लेकिन यह कहां जाकर रुकेगा यह समय और फीनिश लाईन ही बता सकती है।