बेंगलूरु। चंद्रमा पर जल की खोज के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ शुक्रवार को एक संयुक्त प्रयोग किया है। इसके नतीजों से चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव के निकट स्थित गहरे गड्ढे (केट्रर) में बर्फ की मौजदगी के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है। इस केट्रर में हमेशा अंधेरा रहता है, इसलिए यहां बर्फ मौजूद होने की उम्मीद है।
इसरो के सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि ‘बाई-स्टेटिक एक्सपेरिमेंट’ नामक इस प्रयोग में इसरो के उपग्रह ‘चंद्रयान-1’ और नासा के ‘लुनार रिकोनैसेंस ऑर्बिटर’ (एलआरओ) अंतरिक्ष यान का उपयोग किया गया। इस समय ‘चंद्रयान-1’ और ‘एलआरओ’ दोनों चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं। इस प्रयोग में ये दोनों चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव के ऊपर काफी नजदीक से गुजर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि इन दोनों यानों पर नासा के मिनिएचर रेडियो फ्रिक्वेंसी (आरएफ) उपकरण लगे हैं, जो सिंथेटिक एपरचर राडार (एसएआर) की तरह काम करते हैं। ‘चंद्रयान-1’ पर लगे उपकरण को ‘मिनी-एसएआर’ और ‘एलआरओ’ पर लगे उपकरण को ‘मिनी-आरएफ’ कहा जाता है। इन दोनों राडार का प्रयोग शुक्रवार को भारतीय समय अनुसार 00.30 बजे चंद्रमा के एरलैंगर केट्रर पर किया गया। चार मिनट के इस प्रयोग में आंकड़े जुटाए गए।