बीते दस सालों में ब्लॉग और विवाद एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर जहां कभी ब्लॉग को आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बनाया गया तो कभी इससे अश्लीलता परोसी गई। वहीं दूसरी ओर ब्लॉग वैचारिक क्रांति और रचनात्मकता का कैनवास भी बना। अब मांग यह उठ रही है कि देश की सरकारें ब्लॉग के उपयोग, दुरुपयोग को लेकर कठोर गाइडलाइन लागू करें।
सिलिकॉन वैली में भी विवादित ब्लॉग्स के कारण हंगामा मच चुका है। कंपनियों की पॉलिसी, आपसी खींचतान पर भी लोगों के ब्लॉग्स चर्चा में रहे हैं। इसमें गूगल और आईबीएम में काम करने वाले कर्मचारियों पर कंपनी ने कार्रवाई भी की। विश्व के साथ ही भारत में भी ब्लॉग के कारण आईबीएम और प्रोफेशल्स इंस्टीट्यूट आईआईपीएम के बीच तनाव बढ़ गया था।
नौबत ऐसी आ चुकी है कि ब्लॉग पर दी गई प्रतिक्रियाएं भी विवाद बढ़ा देती हैं। कुछ ऐसा ही हुआ सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के साथ। अपने ब्लॉग के जरिए प्रशंसकों के संपर्क में रहने वाले अमिताभ बच्चन को परेशान होकर आखिर कहना पड़ा कि वे ब्लॉग बंद कर देंगे। मध्यप्रदेश में भी ब्लॉग और हिंदी ब्लॉग का अपना संसार है।
मध्यप्रदेश के सक्रिय ब्लॉगर रवि रतलामी बताते हैं कि विवाद तो हैं, लेकिन ब्लॉग की दुनिया तो हमारी कल्पना से भी बड़ी है। ब्लॉगर कभी धर्म, साहित्य और कभी संस्कृति को लेकर आपस में भिड़ जाते हैं। इस दौरान वे गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं जो ठीक नहीं है। इस संबंध में स्वस्थ मानसिकता से सार्थक कदम उठाए जाने चाहिए।
वेबलॉग से ब्लॉग तक : ब्लॉग, वेबलॉग का छोटा स्वरूप है। वेबलॉग शब्द को पहली बार 17 दिसंबर 1997 में जोर्न बैरगेर ने इस्तेमाल किया जबकि ब्लॉग शब्द को सबसे पहली बार पीटर मेरहोल्ज ने अप्रैल या मई 1999 में इस्तेमाल किया था। पायरा लैब्स के इवान विलियम्स ने ब्लॉग को संज्ञा और क्रिया दोनों के तौर पर इस्तेमाल किया साथ ही ब्लॉगर शब्द की शुरुआत की।
ब्लॉग के कारण ऐसे विवाद सामने आए हैं जिनके कारण एक बड़े समूह को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ब्लॉग को लिखते समय उन्होंने सोचा नहीं था कि इस पोस्ट के कारण उन्हें जेल तक जाना पड़ सकता है।
ब्लॉग जैसा कोई नहीं : ब्लॉगर विनीत कुमार कहते हैं कि इंटरनेट पर तो साहित्य अमर हो जाएगा। इससे रचनाओं को खुला आसमान मिलता है और इसे दुनिया भर में कहीं भी पढ़ा जा सकता है। उन्होंने अपने ब्लॉग पर इस मुद्दे पर एक बहस शुरू की है। वे कहते हैं कि ब्लॉग पर व्यक्तिगत आपेक्ष नहीं लगाना चाहिए। इस पर आप न केवल अपने लेख आदि बल्कि तस्वीरें, वीडियो भी दे सकते हैं। यह अलमारी में बंद किताबों जैसा नहीं है। ब्लॉग जैसा दूसरा कोई माध्यम नहीं हो सकता है। इस बहस में कई लोगों ने ब्लॉग के पक्ष में अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
विवादों से बचाना होगा : भारत की परिस्थितियां भी ऐसी है कि लोग सड़कों पर उतरने में देर नहीं लगाते हैं। भले उन्हें मामले या घटना की जानकारी हो या न हो। वहीं कुछ लोग गुबार निकालने के लिए भी ब्लॉग का प्रयोग कर रहे हैं। मनोवैज्ञानिक डा. विनय मिश्रा कहते हैं कि यह सच है कि लोग वाइकेरिस प्लेजर के लिए ब्लॉग का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनका प्रतिशत कम है। भारत में पहला ब्लॉग 2 मार्च 2003 को लिखा गया था। यहां ब्लॉगर्स की संख्या जापान और अमेरिका की तुलना में बेहद कम है। यहां तकनीक और उसके इस्तेमाल आदि को लेकर परिपक्वता आने में समय लगेगा।
ब्लॉग के कारण कई लोगों को भुगतना पड़ी कड़ी सजा
मिस्र : चार साल की सजा
ब्लॉगर करीम आमेर को ब्लॉग के माध्यम से राष्ट्रपति होसनी मुबारक और इस्लामिक संस्था के अपमान करने पर चार साल कैद की सजा सुनाई गई थी। वह देश का पहला शख्स था जिसे इस तरह सजा दी गई। इसके बाद सरकार ब्लॉग पर लिखी गई बातों को लेकर सजग हुई।
म्यांमार : 20 साल की कैद
सैन्य सरकार के प्रमुख थान श्वे के काटरून को ब्लॉग पर भेजने वाले नाय फोन लैट को 20 सालों की सजा दी गई। इसकी निंदा करते हुए एक बड़े वर्ग ने कार्रवाई को तानाशाह की सनक कहा था। म्यांमार में शासक थान श्वे ने इसी तरह कई लेखकों और पत्रकारों को भी सजा दी है।
सिंगापुर : जेल भेजा
अपने ब्लॉग पर मुस्लिम विरोधी बातें लिखने के कारण चीन मूल के दो नागरिकों को जेल में बंद कर दिया था। सिंगापुर शासन ने इसे देश की सत्ता का विरोधी मानते हुए कार्रवाई की थी। उसका कहना था कि एक बड़ा अपराध है। वहीं कुछ लोगों ने इसे दमन की कार्रवाई बताया था।
सूडान : देश निकाला दिया
ब्लॉगर अब्देल मोनेम मेहमूद को सरकार विरोधी बातें लिखने के कारण अप्रैल 2007 में गिरफ्तार किया गया था। उसने सेना और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि जान प्रोनक पर अपनी राय पर्सनल ब्लॉग पर लिखी थी। इस पर सरकार ने मेहमूद को तीन दिनों के भीतर सूडान छोड़ने को कहा था।
ब्लॉग ले डूबा
अमेरिका : विमान परिचायिका एलेन सिमोनेट्टी को डेल्टा एयरलाइंस ने नौकरी से निकाल दिया क्योंकि उसने अपनी कुछ तस्वीरें ब्लॉग पर पोस्ट की थीं जिसमें वह कंपनी की यूनिफार्म पहने हुए थी।
ब्रिटेन : लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में सीनियर लेक्चरर इरिक रिंगमार को 2006 में नौकरी से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने अपने ब्लॉग पर स्कूल की शिक्षा गुणवत्ता पर चर्चा की थी। इससे स्कूल प्रशासन नाराज था।
अमेरिका : बास्केटबॉल टीम डलास मेवरिक्स के मालिक मार्क कूबन को ब्लॉग पर एनबीए और उसके अधिकारियों की 2006 में बुराई करने पर जुर्माना भरना पड़ा था। इस मामले ने मीडिया में भी तूल पकड़ा था।
अमेरिका : गूगल में असिस्टेंट प्रोडक्ट मैनेजर मार्क जेन को 2005 में नौकरी से हटा दिया गया था क्योंकि उन्होंने कंपनी की घोषणा से एक हफ्ते पहले कंपनी के नए प्रोडक्ट आदि की सूचना ब्लॉग के माध्यम से जारी कर दी थी।
भारत : आईआईपीएम के गलत दावों का खुलासा ब्लॉग पर करने वाले गौरव साबनिस को आईबीएम से इस्तीफा देना पड़ा। संस्थान ने कहा था कि वह विरोध के लिए आईबीएम के लैपटॉप जलाएगा।
अमेरिका : युवती जेसिका कटलर ने अपने ब्लॉग ‘द वाशिंगटनीन’ में सैक्स लाइफ के बारे में लिखा था। उस दौरान वह अमेरिकी संसद में सहायक थी। जानकारी के ब्लॉग में आते ही उसे नौकरी से हटा दिया गया।
पेरिस : कैथरीन सैंडरसन को इसलिए नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि वह ब्लॉगिंग करती थी। हालांकि उसके ब्लॉग पर कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था। कैथरीन ने कोर्ट की शरण ली और उसे मुआवजा राशि मिली।