वॉशिंगटन. शोधकर्ताओं के दावों पर यकीन किया जाए तो वे कुछ माह में कृत्रिम जीवन का विकास करने में सफल होंगे। दुनिया के प्रमुख जीवविज्ञानियों में से एक डॉक्टर क्रेग वेंटर ने बताया कि उनके साथी शोधकर्ताओं ने इसमें सबसे बड़ी बाधा पार कर ली है।
वैज्ञानिकों ने पहले मानवनिर्मित जीवधारी के रूप में एक सूक्ष्मजीव की संरचना की है और यह इस बात की तस्दीक करता है कि शोधकर्ताओं की तकनीक काम करती है। इसके बाद शोधकर्ता और अधिक जटिल संरचना वाले कृत्रिम जीवों की रचना करेंगे जो कोयले को प्राकृतिक गैस में बदल सकें।
इनका इस्तेमाल विभिन्न बीमारियों में काम आने वाले टीके और एंटी बायोटिक बनाने में भी किया जा सकता है। डॉ. वेंटर ने कहा ‘वर्ष के अंत तक हम जीवधारियों की कृत्रिम प्रजाति तैयार करने में सफल हो जाएंगे।’गत जनवरी में शोधकर्ताओं ने एक नए बैक्टीरिया का समूचा जेनेटिक कोड बनाया था जबकि इससे पहले 2007 में उन्हें एक बैक्टीरिया के जीन दूसरे में प्रत्यारोपित करने में सफलता मिली थी। शोधकर्ताओं ने कहा है कि हालांकि प्रत्येक सूक्ष्मजीव के जीन इतनी आसानी से परिवर्तित नहीं किए जा सकते लेकिन इसकी अधिक संभावना है कि ऐसा संभव हो।
इस तरह किया शोध
मैरीलैंड स्थित जे क्रेग वेंटर इंस्टिटच्यूट में काम करने वाले भारतीय मूल के डॉ. संजय वाशी ने बताया कि शोधकर्ताओं ने एक बैक्टीरिया के डीएनए को यीस्ट की कोशिका में बदलने में सफलता हासिल की। उसके बाद इसमें कुछ सुधार कर उसे अलग बैक्टीरिया की कोशिका में तब्दील कर दिया। शोधकर्ताओं ने यह प्रयोग माइकोप्लाज्मा माइकोइडस नामक एक सामान्य बैक्टीरिया पर किया। शोध के दौरान कैरोल लार्टीग और उनके साथी शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया के सारे जीन निकाल कर उसे एक यीस्ट कोशिका में बदल दिया।