शादी के बाद चुस्‍त हो गया हूं: अभिषेक
भास्‍कर नेटवर्क Sunday, August 23, 2009 14:56 [IST]  

शादी के बाद जूनियर बच्चन में वाक़ई संजीदगी आ गई है। वे अपनी ही धुन में काम करते हैं। परिवार को ही सारी ख़ुशियों का स्रोत मानने वाले अभिषेक की फैमिली लाइफ़ भी बढ़िया चल रही है। हालांकि वे परिवार बढ़ाने से जुड़े सवाल सुन-सुनकर बोर हो गए हैं..



अभिषेक बच्चन अब फिल्म इंडस्ट्री की उठापटक से दूर अपनी धुन में काम कर रहे हैं। अपनी सीमित फिल्मी गतिविधियों में रह कर ही वे ख़ुश हैं। ऐश के साथ उनकी जोड़ी को ‘बेस्ट कपल’ कहा जा रहा है।



* आपके कुछ दोस्तों का मानना है कि आप शादी के बाद काफ़ी बेफ़िक्र हो गए हैं।



(हंसते हुए) मैं तो बराबर इसी ऱफ्तार से काम करता रहा हूं। साल में एक या दो फिल्म। सारे लोग ही ऐसा कर रहे हैं। बल्कि आप मेरे बारे में यह कह सकते हैं कि शादी के बाद मैं ज्‍यादा चुस्त हो गया हूं। मणि सर की ‘रावण’ और बाल्की की ‘पा’ पूरी होने को है। इसके साथ ही मेरी तीन नई फिल्में शुरू होने को हैं।



* मणिरत्नम की ‘रावण’ में आप एंटी हीरो (जंगल डकैत) का रोल कर रहे हैं।



काफ़ी हद तक ऐसा है। पर अभी मैं इसके बारे में ज्‍यादा बताना ठीक नहीं समझता, क्योंकि फिल्म मेकिंग प्रोसेस में है। इतना ज़रूर कह सकता हूं कि इसमें फिर मणि सर ने अपना ट्रैक बदला है।



* ‘रावण’ को मणि रत्नम की अब तक की सबसे महंगी फिल्म कहा जा रहा है!



मणि सर जिस तरह से सेल्यूलाइड में रंग भरते हैं, उनकी फिल्मों का बजट बढ़ना नेचुरल है। फिर यह फिल्म तमिल और हिंदी दो भाषाओं में एक साथ बन रही है, इसलिए भी कॉस्ट बढ़ना लाजिमी था।



* इसका शूटिंग शेड्यूल भी कई बार गड़बड़ाया है।



फिल्म मेकिंग में ये बातें कॉमन हैं। कुछ पर्सनल प्रॉब्लम के चलते अक्सर फिल्मों की शूटिंग रुक जाती है। इसका कोई उपाय नहीं है। अब जैसे कि ‘रावण’ की शूटिंग के दौरान मणि सर भी काफ़ी बीमार पड़ गए थे।



* ऐसा कहा जा रहा है कि फिल्म का बजट (नब्बे करोड़) बहुत ज्‍यादा बढ़ जाने से मणि सर काफ़ी अपसेट हैं।



ऐसी बातें मेरी समझ में नहीं आतीं। मैं तो सिर्फ़ इतना जानता हूं कि यह एक महानतम निर्देशक की फिल्म है। उनके सामने फिल्म के बजट जैसी बातें बहुत छोटी हैं।



* फिल्म के दोनों संस्करण की हीरोइन ऐश्वर्या राय हैं, पर आप सिर्फ़ हिंदी संस्करण के हीरो हैं।



असल में दोनों संस्करण का बैक ड्रॉप बिल्कुल अलग रखा गया है। इसलिए मैं तमिल संस्करण के लिए बिल्कुल मिस फिट हूं। यह रोल वहां के स्टार विक्रम कर रहे हैं। चूंकि ऐश साउथ की फिल्मों में काम कर चुकी हैं, उनके लिए तमिल संस्करण में काम करना आसान था।



* फिल्म ‘युवा’ के बाद से आप मणि रत्नम के प्रिय नायक बन गए हैं।



मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि मुझे लगातार उनके साथ काम करने का मौक़ा मिल रहा है। हर बार उनका साथ मेरे लिए कितना फ़ायदेमंद साबित हो रहा है, इसे मैं बयां नहीं कर सकता। वे अपने एक्टर को जिस तरह से सारी बातें समझाते हैं, उसके बाद स्क्रीन पर मैजिक क्रिएट करना बहुत आसान लगने लगता है। ‘गुरू’ के बाद तो मैं उनके इस मैजिक का क़ायल हो गया हूं। वैसे इस फिल्म में गोविंदा जी भी एक अहम रोल कर रहे हैं।



* ऐसा कहा जा रहा है कि ‘गुरू’ के शानदार परफॉर्मेस को आप ‘द्रोण’ और ‘दिल्ली 6’ में नहीं दोहरा सके!



यदि ये फिल्में चल जातीं, तो ऐसी कोई बात सुनने को नहीं मिलती। जहां तक मेरा सवाल है, अपनी किसी फिल्म को लेकर मेरे मन में कोई अफ़सोस नहीं है। कोई भी फिल्म मैं मज़बूरन नहीं करता हूं। मेरी हर फिल्म मेरे बहुत क़रीब है। फिर हमेशा ऐसा संभव नहीं है कि हर फिल्म मेरे लिए ‘गुरू’ बन जाए। अब जैसे कि मैं ‘रावण’ की तुलना ‘गुरू’ से हरगिज नहीं करना चाहूंगा। जबकि इसमें मेरा रोल ‘गुरू’ से भी ज्‍यादा पॉवरफुल है। पर यह मेरी अपनी सोच है। दर्शक इस बारे में कुछ और ही तय करेंगे।



* ‘गुरू’ के बाद ऐसा कहा जा रहा था कि आप ख़ान हीरो के समांतर एक ख़ास मक़ाम पर खड़े हो गए हैं।



यह सब तो मीडिया द्वारा फैलाई गई बातें हैं। ऐसी बातें मेरे जेहन में कभी नहीं आतीं। मैं तो सिर्फ़ इतना जानता हूं कि इसमें मेरे परफॉर्मेस को दर्शकों ने पसंद किया था। बाक़ी इसके बाद मैंने क्या अर्जित किया, ये बातें मेरे लिए ज्‍यादा मायने नहीं रखतीं। मैं अपनी फिल्मों की तारीफ़ और बुराई दोनों ही आसानी से पचा लेता हूं।



* आप भी बिग बी की तरह हर बात को बहुत सुलझे हुए ढंग से कहना पसंद करते हैं।



बेटा होने के नाते मैं लगातार उन्हें फॉलो करता हूं। पर पूरी तरह से उनका अनुसरण कर पाना असंभव है।



* बाल्की की फिल्म में आप उनके पिता के रोल में दिखाई पड़ेंगे।



वाक़ई में उनके साथ काम करना मेरे लिए हमेशा एक चैलेंज होता है। आप यक़ीन नहीं करेंगे, जब भी उनके साथ मेरा कोई शॉट होता है, मैं बहुत नर्वस हो जाता हूं।



* आपकी फैमिली लाइफ़ कैसी चल रही है?



ग़नीमत है आपने यह नहीं पूछा कि फैमिली कब बढ़ा रहे हैं। मैं यह सवाल सुन-सुनकर बोर हो गया हूं। डैड की तरह मेरे लिए भी परिवार हमेशा अहम रहा है। मुझे लगता है कि परिवार में रह कर ही आपको सारी ख़ुशियां मिल सकती हैं। मैं जिसे पसंद करता था, उससे शादी की। अब वही मेरी सारी पसंद का ख्याल रख रही है। इससे ज्‍यादा और क्या चाहिए।

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