करीना : कल आज और कल
जयप्रकाश चौकसे Tuesday, August 25, 2009 12:06 [IST]  

करीना कपूर ने फिल्म उद्योग मंे प्रवेश के समय बड़े गर्व से कहा था कि वह डेविड धवन की मसाला फिल्मों में काम नहीं करेंगी। यह कहते समय वह यह भी भूल गईं कि उनकी बहन करिश्मा ने डेविड धवन के साथ न केवल अनेक सफल फिल्में कीं वरन ‘खटिया भी सरकाई’, जिसके कारण महिला संगठनों का विरोध भी सहा।



उनसे पूछा जाना चाहिए कि उनको लगभग अर्धनग्न प्रस्तुत करने वाली यशराज फिल्म्स की ‘टशन’ और साजिद की ‘कम्बख्त इश्क’ के विषय में उनकी क्या राय है? इनके निर्देशकों के पास डेविड धवन के दसवें सहायक की बुद्धि भी नहीं है। अगर करीना का यह बचाव है कि उन्होंने व्यावसायिक सफलता के लिए इन फूहड़ और लगभग अश्लील फिल्मों में काम किया, तो डेविड धवन भी इसी सफलता के लिए मर्यादा के भीतर मनोरंजक फिल्में रचते रहे हैं। अपनी ढाई दर्जन सफल फिल्मों में शायद उनके कुछ नृत्य, गीत और दृश्य मर्यादा से बाहर हो गए।



सन 2000 में करीना, जो शीघ्र ही बेगम करीना सैफ अली खान हो सकती हैं, ने कहा था कि अच्छे भड़कीले कपड़े पहनकर कोई भी नाच-गा सकता है, परंतु वे सशक्त अभिनेत्री के रूप में विख्यात होना चाहती हैं। केवल ‘जब वी मेट’, ‘ओमकारा’ तथा गोविंद निहलानी की ‘देव’ में वे सशक्त अभिनेत्री लगीं, परंतु शेष फिल्मों में हम उनका वही स्वरूप देखते हैं जो अन्य अभिनेत्रियों का रहा है।



उन्होंने जिस ‘कपूर क्लास’ के दावे किए गए थे, वे कहीं नजर नहीं आते। यह जरूर स्वीकार करना पड़ेगा कि हर असफल फिल्म के बाद उनके दाम भी बढ़े और अधिक काम भी मिला। कारण, फिल्मकारों को लगता रहा कि यह प्रतिभाशाली और अत्यंत सुंदर कन्या कभी भी सुपरहिट दे सकती है। इसी तरह की पिटती हुई उम्मीदों के बीच इम्तियाज अली की ‘जब वी मेट’ प्रदर्शित हुई। इसके बाद वैसे तेवर फिर कभी नहीं दिखे। इस सच्चई को स्वीकार करना करीना के लिए कठिन हो रहा है कि उनका ‘टशन’ में प्रदर्शित ‘जीरो फिगर’ दर्शकों को पसंद नहीं आया। लघुत्तम बिकिनी आपको अधिकतम सफलता नहीं दिलाती, यह भारतीय दर्शक कई बार रेखांकित कर चुके हैं।



दरअसल करीना को विगत 9 वर्षो के पुनरावलोकन के समय ध्यान देना चाहिए कि सुपर सितारे शाहरुख खान के महिमामंडित स्वरूप से प्रभावित होकर वे अपनी दूसरी ही फिल्म ‘अशोका’ में वह सब कुछ एकबारगी उजागर कर चुकी हैं, जिसे होम्योपैथिक डोज की तरह लघु स्वरूप में धीरे-धीरे प्रस्तुत करना था। वर्षो बाद शाहरुख खान की फिल्म ‘डॉन’ में भी संक्षिप्त और उजागर करने वाली भूमिका नहीं करनी चाहिए थी। इसमें कोई शक नहीं कि करीना के पास विलक्षण अभिनय की असीम क्षमता है, परंतु इम्तियाज अली जैसे निर्देशक कितने हैं। उनकी आगामी फिल्मों में राजकुमार हीरानी की आमिर खान अभिनीत ‘थ्री इडियट्स’ से बहुत उम्मीदें की जा सकती हैं और करीना बिना शरीर प्रदर्शित किए भावाभिव्यक्ति कर सकती हैं।

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