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..और ये विधाता बनने पर आमादा हैं
भास्कर नेटवर्क Tuesday, August 25, 2009 15:03 [IST]  

कृत्रिम कोशिका का अविष्कार जीव विज्ञानियों में विवाद का कारण बना हुआ है। इससे पहले सेल से कृत्रिम स्पर्म बना लिया गया था। दोनों ही विषयों पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि वे जल्द ही जीव बना लेने में सक्षम होंगे।



इधर, आलोचकों का कहना है कि ऐसा करना प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ना होगा। भविष्य में इसका गलत इस्तेमाल होने लगेगा।




मेडिकल साइंस के लिए वरदान माना जाने वाला अप्राकृतिक सेल और स्पर्म विवादों में है। अमेरिका के बायोलॉजिस्ट क्रेग वेंटर ने अप्राकृतिक सेल और इंग्लैंड के बॉयोलॉजिस्ट करीम नायरनीया ने अप्राकृतिक स्पर्म का विकास किया है। इस तकनीक से बने स्पर्म का इस्तेमाल जीवन के विकास में किया जा सकता है। वहीं स्पर्म के उपयोग से पिता बनने में अक्षम पुरुष भी पिता बन सकेंगे।



ये है विवाद का कारण



अमेरिका के मेरीलैंड के वैज्ञानिक क्रेग वेंटर ने मानव निर्मित जीवधारी के रूप में एक सूक्ष्मजीव की संरचना कर एक नए विवाद को जन्म दिया है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले समय में वे और अधिक जटिल संरचना वाले कृत्रिम जीवों की रचना करेंगे। जो कोयले को प्राकृतिक गैस में बदल सकने में सक्षम होगा। इसका इस्तेमाल विभिन्न बिमारियों में काम आने वाले टीके और एंटी बायोटिक बनाने में भी किया जा सकता है।



डॉ. वेंटर ने यह भी दावा किया है कि इस वर्ष के अंत तक हम जीवधारियों की कृत्रिम प्रजाति तैयार करने में सफल हो जाएंगे। इसके पहले जनवरी में क्रेग वेंटर की टीम ने एक नए बैक्टिरिया का समूचा जेनेटिक कोड बनाया था। वहीं 2007 में उन्हें एक बैक्टीरिया के जीन दूसरे में प्रत्यारोपित करने में सफलता मिली थी। उसी समय से उन्हें इसमें सफल होने की उम्मीद थी। शोधकर्ताओं का कहना है कि सूक्ष्मजीव के सभी प्रजातियों को आसानी से परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।



ऐसे बनी कृत्रिम कोशिका



शोधकर्ताओं ने एक बैक्टिरिया के डीएनए को यीस्ट की कोशिका में बदलने में सफलता हासिल की। इसके बाद इसमें कुछ सुधारकर उसे अलग वैक्टीरिया की कोशिका में बदल दिया। शोधकर्ताओं ने यह प्रयोग माइक्रोप्लाजमा नामक एक सामान्य बैक्टीरिया पर किया। उसके सारे जीन निकाल कर उसे एक यीस्ट कोशिका में बदल दिया।



ऐसे बनाया



शोधकर्ताओं ने एक बैक्टिरिया के डीएनए को यीस्ट की कोशिका में बदलने में सफलता हासिल की। इसके बाद इसमें कुछ सुधारकर उसे अलग वैक्टीरिया की कोशिका में बदल दिया। शोधकर्ताओं ने यह प्रयोग माइक्रोप्लाजमा नामक एक सामान्य बैक्टीरिया पर किया। उसके सारे जीन निकाल कर उसे एक यीस्ट कोशिका में बदल दिया।



लेकिन नहीं बन पाएंगे बॉयोलॉजिकल पिता



न्यू कैसेल यूनिवर्सिटी इंग्लैंड के बॉयोलोजिस्ट नायरनिया का कहना है कि पुरुष के स्पर्म की जगह इस अप्राकृतिक स्पर्म से महिला के एग को फर्टीलाइज किया जाएगा और इस तरह भ्रूण का विकास स्त्री के गर्भ में होगा। इस अप्राकृतिक स्पर्म से पुरुष अपने बच्चे के बॉयोलॉजिक पिता नहीं बन पाएंगे।



1960 में हुई थी पहली रिसर्च



स्टेम सेल पर सबसे पहले रिसर्च कनाडा के वैज्ञानिक अर्नेस्ट ए मैककुलोक और जेम्स ई टील ने 1960 में की थी। इन्होंने दो तरह के स्टेम सेल एम्ब्रिायोनिक और एडल्ट का विकास किया था। एम्ब्रिायोनिक स्टेम सेल को शरीर के आंतरिक सेल से अलग किया जाता है वहीं एडल्ट स्टेम सेल परिपक्व टिशू में पाए जाते हैं।



असफल भी रहे..



न्यूकैसेल रिसर्च टीम ने महिलाओं के सेल से स्पर्म तैयार करने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे यह पता चलता है कि जीवन के विकास में पुरुष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हालांकि उन्हें फिमेल स्टेम सेल से एग बनाने में सफलता की आशा है।



स्टेम सेल लॉ



स्टेम सेल उपयोग के लिए हर देश में अलग-अलग कानून हैं। स्वीडन, फिनलैंड, बेल्जियम, ग्रीस, ब्रिटेन, डेनमार्क और नीदरलैंड में रिसर्च के लिए मानव भ्रूण का इस्तेमाल किया जा सकता है जबकि जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, इरलैंड, इटली और पुर्तगाल में गैरकानूनी है। वहीं भारत, जापान, इरान, इजराइल, साउथ कोरिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया इस अनुसंधान में सहयोग दे रहे हैं।



खिलवाड़ है ये



रिप्रोडक्टिव इथिक्स के विशेषज्ञ जोसफिन क्वांटेवेला कहती हैं कि कृत्रिम स्पर्म स्वस्थ नहीं होता। इस स्पर्म से जन्म लेने वाले बच्चे में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। अत: मानव जीवन के साथ यह खिलवाड़ है। वहीं हेल्थ केयर इथिक्स के लेक्चरर डॉ. ट्रीवर स्टैमर्स ने चेतावनी दी है कि ऐसे बच्चों का विकास जिसके जीवन में पिता का आस्तित्व न हो, वह समाज द्वारा स्वीकृत नहीं होगा।



बढ़ावा देना चाहिए



डॉक्टर वेंडर के लगातार प्रयास के कारण मानव निर्मित कोशिका का विकास हो पाया है। लोगों को सिंथेटिक जिनोमिक्स के महत्व को समझते हुए रिसर्च को बढ़ावा देना चाहिए ।



डॉ. संजय वाशी, वैज्ञानिक, मैरीलैंड



इस नए प्रयोग से विश्व का परिदृश्य बदल जाएगा। प्रयोग की दुनिया में यह बहुत ही महत्वपूर्ण प्रयोग है।



मार्क स्मिथ, छात्र, यूनाइटेड किंगडम,



रोक लगाई जाए



मानव विकास की प्रक्रिया के साथ प्रयोग करना घातक सिद्ध हो सकता है। जीवित प्राणियों पर प्रयोग कोई नई बात नहीं है लेकिन इसके परिणाम के बारे में कोई नहीं जानता। जीएम क्रॉप भी नए प्रयोग का परिणाम है लेकिन इससे प्रकृति के दूसरे स्रोत प्रभावित हुए हैं। यह वैज्ञानिकों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।



जोयस किलमर, साहित्यकार, अमेरिका



आलोचकों का कहना है कि अप्राकृतिक कोशिका बनाने के क्षेत्र में जो रोज नए प्रयोग हो रहे हैं यह गलत हाथों में जा सकता है। तथा लोग इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।यह तो समय ही बताएगा कि रिसर्च में शोधकर्ताओं को कितनी कामयाबी मिलती है। फंड पाने के लिए शोधकर्ता ऐसा कर रहे हैं।



लियाम बी, छात्र, यूनाइटेड किंगडम

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