नाम और पैसा तो सैकेंडरी चीज़ें हैं : दीपिका
सुनील कुकरेती Tuesday, August 25, 2009 17:18 [IST]  

‘लव आजकल’ की हालिया कामयाबी से दीपिका की पिछली फ़िल्म ‘चांदनी चौक टू चाइना’ की नाकामी का दाग़ धुल गया है। अब वह फिर से चमचमाने लगी हैं। वैसे देखा जाए, तो कम फ़िल्में करने की वजह से दीपिका के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि उनकी हर फ़िल्म का प्रदर्शन अच्छा रहता है। अब दीपिका को फ़रहान अ़ख्तर और अक्षय कुमार के साथ आने वाली फ़िल्मों का इंतज़ार हैं, जिन्हें पूरा करने में वह लगी हैं। आइए दीपिका से जानें कुछ नया—



आप दीपिका को एक श़िख्सयत और एक सैलिब्रिटी के तौर पर किस तरह व्यक्त करना चाहेंगी?



मैं अपने आपको सैलिब्रिटी मानती ही नहीं हूं। इसका कारण मैं अपनी बेहतरीन परवरिश को मानती हूं। मेरे माता-पिता ने मुझे वह ज़मीनी संस्कार दिए हैं, जिनसे मैं हर समय आम इंसान की तरह रह सकती हूं। सफलता मुझे बहकाती नहीं है। मैं अपने पिता को देखती हूं, तो पाती हूं कि वह नाम और पैसे से •यादा अपने काम को महत्व देते हैं और उसका आनंद उठाते हैं। मेरा मतलब है कि नाम और पैसा तो सैकेंडरी चीज़ें हैं, उससे पहले हमें अपने काम को इंजॉय करना चाहिए।



जब सफलता मिलती है, तो उसे किस तरह इंजॉय करती हैं?



कोई ख़ास ढंग नहीं है। मैं फैमिली पर्सन हूं, तो मुझे अपने परिवार के साथ समय बिताना •यादा अच्छा लगता है। कुछ फ्रैंड्स हैं, वह भी साथ हो जाते हैं, तो और अच्छा लगता है। मुझे चॉकलेट खाना बहुत पसंद है। मैं तो बच्चों की तरह एक-दो चॉकलेट खाकर भी इंजॉय कर लेती हूं।



आपने और आपके पिता ने पिछले दिनों आमिर ख़ान के साथ बैडमिंटन मुक़ाबला किया था, जिसमें आमिर की जोड़ी जीत गई थी। मेरा सवाल यह है कि किसी फ़िल्म के प्लॉट और प्ले ग्राउंड में कुछ समानता देखती हैं? मतलब फ़िल्मी प्लॉट में किसी को हराने की रणनीति बनाती हैं?



अरे नहीं, नहीं। फ़िल्मी प्लॉट में किसी को हराने की नीयत मैं नहीं रखती हूं। मैं बस इतना ध्यान ज़रूर रखती हूं कि जो काम या रोल मुझे दिया गया है, वह मैं ठीक ढंग से करूं। पूरे मन के साथ उसे करूं।



आप मॉडलिंग से आई हैं, तो अब मॉडलिंग का शौक़ किसी तरह पूरा करती हैं?



मैं जो इंडोर्समैंट्स करती हूं, उनसे मुझे मॉडलिंग की संतुष्टि मिल जाती है। कभी-कभार किसी डिज़ाइनर फ्रैंड के लिए रैम्प पर भी चल लेती हूं।



आप इंडोर्समैंट्स करती हैं, तो कभी विश्व स्तर पर लोकप्रिय होने के लिए हॉलीवुड फ़िल्मों के बारे में सोचती हैं?



अगर कोई अच्छा प्रोजैक्ट सामने आया, तो ज़रूर करना चाहूंगी, पर मैं अपनी तरफ़ से ऐसी कोई कोशिश नहीं कर रही हूं।

आपने फ़िल्मी लोकप्रियता का पहला स्वाद कब चखा?



नवंबर 2007 में ‘ओम शांति ओम’ रिलीज़ हुई थी। मैं तब लंदन में थी। निर्देशक फ़राह ख़ान गर्भवती थीं और इंडिया में थीं। रिलीज़ से दो दिन पहले शाहरुख़ जी से मेरी बात हुई थी। तब उन्होंने कहा था कि दो दिन बाद मेरी ज़िंदगी बदल जाएगी। फ़िल्म की रिलीज़ के कुछ दिन बाद मैं जब हिंदोस्तान वापस आई, तो वाक़ई मुझे वैसा ही लगा, जैसा शाहरुख़ जी ने कहा था। एयरपोर्ट पर लोग मुझे जिस तरह से देख रहे थे, वह मेरे लिए काफ़ी चौंकाने वाला था। लोकप्रियता का पहला स्वाद मैंने एयरपोर्ट पर ही चखा था।



आपकी आने वाली फ़िल्में कौन-सी हैं?



साजिद ख़ान के निर्देशक की ‘हाउसफुल’ में अक्षय कुमार मेरे अपोज़िट हैं। निर्माता-अभिनेता फ़रहान अ़ख्तर की फ़िल्म ‘कार्तिक कॉलिंग कार्तिक’ में मैं फ़रहान के अपोज़िट हूं। इसका निर्देशन विजय लालवानी ने किया है। इनके अलावा सैफ़ अली ख़ान के साथ ‘एजेंट विनोद’ कर रही हूं। ‘पाइरेट’ और एक तेलुगू फ़िल्म ‘लव फॉर एवर’ भी हैं।

तेलुगू फ़िल्म ‘लव फॉर एवर’ में आप ने आइटम सॉन्ग किया है?



जी हां, उसमें मैंने एक डांस नंबर किया है। वह एक गैस्ट अपीयरेंस है। दरअसल, फ़िल्म के निर्देशक जयंत साउथ के काफ़ी बड़े निर्देशक हैं। वह ऐश्वर्या जी को फ़िल्म ‘रवोइ चंदामामा’ में लॉन्च कर चुके हैं। उनके अलावा बिपाशा जैसी कई हीरोइनों को वह साउथ में लॉन्च कर चुके हैं। ‘लव फॉर एवर’ के डांस नंबर की कोरियोग्राफ़ी अहमद ख़ान ने की है। यह काफ़ी अच्छा सॉन्ग है, जिसे करने की मुझे ख़ुशी है। -

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