स्वाइन फ्लू आज खतरनाक बीमारी के रूप में दुनियाभर में आतंक मचा रहा है,लेकिन वायरस जनित यह बीमारी अपनी तरह की कोई पहली बीमारी नहीं है। इसी तरह के फ्लू से 19 वीं सदी में करोड़ों लोगों मौत के मुंह में समा चुके हैं। समय-समय पर फ्लू के रूप में इन बीमारियों ने दुनियाभर में मौत का तांडव फैलाया था। 1918-19 में फैले स्पैनिश फ्लू की वजह से दुनियाभर में करीब पांच करोड़ लोगों की मौत हुई थी। इसी तरह अगस्त 1957 में फैले एशियन फ्लू से केवल अमेरिका में ही 60000 लोगों की मौत हुई थी। आज स्वाइन फ्लू तेजी से दुनिया में पैर पसार रहा है और दुनियाभर के वैज्ञानिक इससे बचने के रास्ते तलाश रहे हैं। इस बीमारी को लेकर वैज्ञानिक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। इसकी तुलना कई पिछली इन्हीं बीमारियों के वायरस से कर इलाज खोजने में वैज्ञानिक जुटे हैं। पहले आइए जानते हैं वायरस आधारित बीमारियों का इतिहास...
स्पेनिश फ्लू...
वर्तमान में बहुत कम लोग ही जानते हैं कि दुनिया में अधिकांश मौतें महामारी की वजह से हुई हैं। इतिहासकारों के मुताबिक 1918-19 में फैले स्पैनिश फ्लू की वजह से दुनियाभर में करीब पांच करोड़ लोगों की मौत हुई थी।
एशियन फ्लू:
एशियन फ्लू की शुरुआत हांगकांग से मानी जाती है। इसके बाद यह दुनिया के कई देशों में फैला था। इससे पीडि़त होने पर व्यक्ति लगातार बीमार रहता था और उसकी मौत लगभग तय होती थी। उस समय वैज्ञानिकों ने इस बीमारी के वायरस को एच2एन2 नाम दिया था। अमेरिका ने इस तरह की महामारियों से निपटने के लिए सीडीसी नाम से एक डिपार्टमेंट की स्थापना की थी। जिसका काम ऐसी बीमारियों से निपटने के लिए कार्ययोजना बनाना है। सीडीसी के मुताबिक इस समय अमेरिका में छह वैक्सीन निर्माता कंपनियां ऐसी बीमारियों से निपटने के इंजेक्शन बना रही हैं।
अगस्त के अंत तक फ्लू ने चीन, जापान, फिलीपींस, मलाया और भारत समेत एशिया के कई देशों मे अपने पैर पसार लिए थे। दक्षिणी यूरोप, मध्य व दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के तटीय देशों में भी यह दोबारा सक्रिय होने लगा। अकेले अमेरिका में ही एशियन फ्लू (1957-58) की वजह से करीब 60000 मौतें हुई थीं। जिसमें से 40000 मौतें गरमी के मौसम में और 20000 मौतें ठंड के दिनों में हुई थीं।
रशियन फ्लू...
वैज्ञानिकों का कहना है कि एच1एन1 रशियन फ्लू का ही एक रूप है। रशियन फ्लू 1977 में फैला था। उस समय मीडिया में ऐसी खबरें आईं थीं कि किसी एशियाई देश में हुए अज्ञात प्रयोग की वजह से यह बीमारी फैली थी। इसी तरह से हांगकांग फ्लू भी था, जो कि 1968 में फैला था और जिसे एच3एन2 कहा गया था।
क्या इन बीमारियों के सबक बनेंगे स्वाइन फ्लू के इलाज में मददगार...
अमेरिका में स्वाइन फ्लू से पीडि़त 44000 लोगों में से अधिकांश वे हैं जिनकी उम्र 65 वर्ष से कम है। ये ठीक वहीं आयुवर्ग है जिससे 1957 में एशियन फ्लू के समय की आबादी प्रभावित हुई थी। इसी को एक आधार बनाकर वैज्ञानिक ऐसा मान रहे हैं कि कहीं ना कहीं स्वाइन फ्लू के लिंक पिछली शताब्दी में महामारी का रूप लेने वाले एशियन फ्लू में देखे जा सकते हैं।
ठंड में बढ़ जाएगा खतरा...
फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ महीने स्वाइन फ्लू को लेकर काफी मुश्किल साबित हो सकते हैं। गर्मी के महीनों में यह बीमारी उतनी नहीं फैलती है जितनी ठंड के मौसम में। प्रारंभिक शोध से यह भी पता चला है कि युवाओं और बच्चों में यह बीमारी ज्यादा तेजी से फैलती है। अमेरिकी स्वास्थ्य वैज्ञानिक इस समय स्वाइन फ्लू से निपटने में जुटे हुए हैं, क्योंकि उनका मानना है कि अगले दो-तीन महीनों में यह और ज्यादा विकराल रूप ले सकता है। कुछ वैज्ञानिकों का माना है कि स्वाइन फ्लू 1957 की महामारी की तरह ही तबाही मचा रहा है। तत्कालीन आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि उस समय फैले एशियन फ्लू की चपेट में सबसे ज्यादा युवा ही आए थे। आंकड़ो के अनुसार उस समय मरने वालों में 40 फीसदी वे लोग थे, जिनकी उम्र 65 वर्ष से कम थी।
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