इतिहास का जीवंत प्रतीक- चंदेरी
भास्कर.कॉम Wednesday, August 26, 2009 17:05 [IST]  

chanderiअगर आप घूमने फिरने के शौकीन हैं तो इस बार आपके लिए चंदेरी एक बेहतरीन पर्यटन विकल्प हो सकता है । मध्यप्रदेश में स्थित चंदेरी ऐतिहासिक रूप से भारत का एक महत्वपूर्ण स्थान है,चंदेरी का इतिहास ग्यारहवी शताब्दी के आस-पास से मिलता है।



चंदेरी की स्थिति सामरिक, व्यापारिक दृष्टि से बहुत उपयोगी है इसीलिए इस जगह पर हमें जीवंत इतिहास के कई बिंदु मिलते हैं। अगर आप भारतीय इतिहास अथवा परंपरा में विश्वास रखते हैं अथवा आपको प्राकृतिक सौंदर्य से लगाव है दोनों हो स्थितियों में आपके लिए यहाँ बहुत कुछ है-



मुग़ल कालीन किला-



चंदेरी में मुग़ल काल का एक भव्य किला है जो की एक पहाडी पर २०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.किले का मुख्या प्रवेश द्वार खुनी दरवाजा कहलाता है।



कोशक महल-



इस भव्य किले को 1445 ईसवी में मालवा के महमूद खिलजी ने बनवाया था। इस किले की वास्तुकला मांडू से काफी मिलती जुलती है।



बादल महल गेट और जामा मस्जिद -



चंदेरी शहर में स्थित ये विशाल द्वार पुराने शासको की किसी विजय का प्रतीक है। इसके अलावा यहाँ की जामा मस्जिद मध्य भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। जिसके गुम्बद और मीनार देखने लायक हैं।



शहजादी का रोजा-



अलंकृत मेहराबों और ज्यामितिक वास्तुबोध से भरा-पूरा शहजादी का रोजा किसी राजकुमारी का स्मृतिस्थल है।



बत्तीसी बावडी-



बत्तीस सीढियों की ऊँचाई पर स्थित ये बावडी पुराने समय में अत्यंत अहम् थी।



परमेश्वर ताल और बुड्ढी चंदेरी-



चंदेरी से आधा मील उत्तर पश्चिम में बुंदेला राजाओ का बनवाया परमेश्वर ताल है जहाँ बहुत से मंदिर और राजाओ की समाधियाँ हैं। इसके अलावा चंदेरी शहर का पुराना हिस्सा जो बुड्ढी चंदेरी कहलाता है उसमें कई जैन मंदिर स्थित हैं।



कैसे जाएँ -



अक्टूबर से मार्च चंदेरी घूमने का सबसे अच्छा समय है । यहां से नजदीकी हवाई अड्डे भोपाल 258 और ग्वालियर 259 किमी हैं। ललितपुर 36 किमी और झाँसी 124 किमी यहाँ से नजदीकी अहम् स्टेशन हैं। इसके अलावा ग्वालियर इंदौर गुना शिवपुरी से चंदेरी के लिए बस सेवा भी उपलब्ध है।

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