बांधवगढ़ मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में स्थित देश का एक प्रमुख नेशनल पार्क है। विन्ध्य श्रेणी के अर्न्तगत ४४९ वर्ग किलोमीटर में फैला ये पार्क अपनी बहुत सी खासियतों के लिए जाना जाता है यहाँ बाघों का आबादी-घनत्व सबसे ज्यादा है। बांधवगढ़ विश्वप्रसिद्ध सफ़ेद बाघों का भी केंद्र रहा है जो की रीवा रियासत की शान समझे जाते थे। पार्क का नाम इसके बीचों-बीच स्थित बांधवगढ़ पहाडी के नाम पर रखा गया है जो की समुद्र तल से मीटर ऊंची है। ये जगह पर्यटन के लिहाज से बड़ी मुफीद है। वन्य जीवन, प्राकृतिक सुषमा दोनों ही यहाँ अपने चरम पर हैं। यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं -
किला-
बांधवगढ़ में एक अतिप्राचीन किला है जिसके निर्माण की सही तिथि अभी तक ज्ञात नहीं है। फिर भी अनुमान के आधार पर इसे २००० साल पुराना माना जाता है। शिव पुराण में भी इस किले का उल्लेख मिलता है। इस किले पर कई राजवंशों का अधिकार रहा है। ये एक देखने लायक बिंदु है।
परिवेश-
बांधवगढ़ का परिवेश वन्य जीवन के बहुत अनुकूल है इसीलिए यहाँ मध्य और उत्तर भारत की लगभग सभी प्रमुख प्रजातियाँ फलती फूलती हैं । साल, आदि वृक्ष यहाँ बहुतायत से मिलते हैं । घाटियाँ , ढाल, जलस्रोत आदि अवयव यहाँ के वन्य जीवन की अभिवृद्धि तो करते ही हैं साथ ही प्राकृतिक सुन्दरता भी बढाते हैं।
वन्य जीवन-
बांधवगढ़ में वन्यजीवन अपने विराट रूप में दीखता है ।तीस के लगभग स्तानियों की प्रजातियाँ और पक्षियों की २५० प्रजातियाँ यहाँ मिलती हैं। जिनमे सफ़ेद बाघ, शाही बाघ, रहिसस बन्दर, लोमडी, ऊदबिलाव, लंगूर, भेड़िया, हिरन,चिंकारा,गौर , गिद्ध,सारस,बाज, चील,सफ़ेद कबूतर, बुलबुल, फाख्ता आदि सभी कुछ है ।
वन्य-जीवन दर्शन-
बांधवगढ़ में वन्यजीवन का दर्शन अपने आप में अनूठा है । यहाँ हाथी पर सवार होकर या जीप के ज़रिये घूमा जा सकता है। यहाँ आपके लिए गाइड भी उपलब्ध है जो आपको इस जगह के बारे में और जानकारी दे सकता है।
कब जाएं -
फ़रवरी से जून पार्क घूमने का सबसे अच्चा समय है. मानसून के कारण पार्क १ जुलाई से १५ अक्टूबर तक बंद रहता है. जबलपुर(164 किमी) यहाँ से नजदीकी हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन है इसके अलावा मध्यप्रदेश के अधिकांश शहरों से बांधवगढ़ के लिए बस सेवा मिल जाती है