शौर्य का अद्वितीय प्रतीक- ग्वालियर
भास्कर.कॉम Sunday, August 30, 2009 17:05 [IST]  

jvग्वालियर भारत के उन ऐतिहासिक स्थलों में है जहाँ भारतीय शौर्य के अनंत जीवंत प्रमाण मिलते हैं। इसके साथ ही ये शहर आधुनिकता की दौड़ में भी पीछे नहीं है। निखरा हुआ और चमकता हुआ ये शहर कई राजवंशो के शासन का गवाह रहा है। प्रतिहार, कुशवाह,तोमर सभी ने इसे अगणित प्रतीक दिए हैं। यहाँ के मंदिरों, स्मारकों सभी में आप यहाँ की सुनहरी कहानी को पढ़ सकते हैं । सिंधिया वंश ने तो इसे एक नयी पहचान ही दी है। पर्यटन की अपार धरोहरे संजोए ग्वालियर अपने आप में अद्वितीय है -



किला-



ग्वालियर का किला विश्व प्रख्यात है। इस किले को भारत का एकमात्र अविजित किला होने का गौरव प्राप्त है। मुग़ल बादशाह बाबर ने इसे किलों का सम्राट कहा था। बलुए पत्थर से बने इस किले पर जैन तीर्थंकरों के चित्र उत्कीर्ण हैं। ये एक शानदार भवन है। किले के अन्दर मध्य कालीन स्थापत्य कला के शानदार नमूने देखे जा सकते हैं ।पुरातत्व विभाग ने इस किले में एक संग्रहालय भी स्थापित किया है।



मान सिंह पैलेस-



१४८६ से१५१७ के मध्य निर्मित मान सिंह पैलेस हलाँकि अब अपने पहले जैसे स्वरुप में नहीं है लेकिन इसके अवशेष भी इसके सुनहरे अतीत की दास्ताँ कहने के लिए पर्याप्त हैं । ये जगह राजपूत स्त्रियों द्वारा अतीत में किये जाने वाले "जौहर" की भी गवाह रही है। मुग़ल बादशाह औरंगजेब का भी सम्बन्ध इस महल से रहा है ।



तेली का मंदिर-



ग्वालियर के महत्वपूर्ण स्थलों में तेली का मंदिर भी है। नौवी शताब्दी का ये मंदिर प्राचीन स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। भगवान् विष्णु को समर्पित ये मंदिर द्रविड़-आर्य शैली का समागम है । यहीं पर सास बहु मंदिर और गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ भी हैं जिसे गुरु हरगोबिन्द जी से सम्बद्ध बताया जाता है। पास ही सिंधिया स्कूल भी है जिसका शुमार भारत के सबसे अच्छे स्कूलों में होता है .



जय विलास पैलेस-



सिंधिया परिवार के आधिपत्य वाला जयविलास पैलेस राजसी वैभव का मुकम्मल नमूना है। इसकी चांदी की ट्रेन के चर्चे तो सभी ने सुने हैं लेकिन इसका फर्नीचर, आईने,दरियां सभी कुछ शाही हैं. सिंधिया म्यूजियम यहाँ आने वाले लो गों को शाही भारत की झलक पेश करता है।



स्मारक-



वैसे तो पूरा ग्वालियर ही एक स्मारक है लेकिन भारतीय संगीत परंपरा के महान साधक तानसेन का स्मारक भी यहीं है। इसके अलावा अफगान शहज़ादे गॉस मुहम्मद, स्वतंत्रता नायक तात्या टोपे, झाँसी की रानी के स्मारक भी यहीं स्थित हैं।



इसके अलावा यहाँ पर कला वीथिका, सूर्यमंदिर, चिडियाघर आदि भी घूमने लायक जगह है।



कैसे जाएँ ? दिल्ली और भोपाल से ग्वालियर सड़क, वायु और रेल सभी मार्गो से जुडा है और कभी भी घूमा जा सकता है।

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