Chandigarh
पहले बनेंगे फ्लैट, फिर अलॉटमेंट
भास्कर न्यूज Monday, August 31, 2009 02:30 [IST]  

चंडीगढ़. लोगों को समय पर फ्लैट न दे पाने के कारण आलोचना झेल रहे चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने अब फ्लैट अलॉट करने के लिए डीडीए यानी दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी की नीति अपनाने का फैसला किया है। इसके मुताबिक चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) हाउसिंग प्रोजेक्ट में पहले अपने पैसे से फ्लैट बनाएगा।



लोगों के लिए स्कीम उस वक्त निकाली जाएगी जब फ्लैटों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में होगा। ऐसे में अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी होने तक फ्लैट भी तैयार हो जाएंगे और लोगों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। फिलहाल अलॉटमेंट की प्रक्रिया इससे ठीक उलट है, यानी सबसे पहले स्कीम निकाली जाती है, फिर फ्लैट अलॉट होते हैं और उसके बाद निर्माण कार्य शुरू होता है। ऐसे में लाखों रुपये भरने के बावजूद लोगों को फ्लैट के लिए लंबा इंतजार तो करना ही पड़ता है साथ ही लोन की किश्त का भार भी उठाना पड़ता है।



सेक्टर-53, 54 से होगी शुरुआत



चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने सेक्टर-53 और 54 में करीब 60 एकड़ जमीन पर सबसे बड़ी आवासीय योजना तैयार की है। बोर्ड को जमीन का कब्जा मिल चुका है। यहां एक से लेकर तीन बेडरूम फ्लैट बनाए जाएंगे। यहां डीडीए की पॉलिसी के तहत ही फ्लैट दिए जाएंगे। सेक्टर- 52 और 56 में कर्मचारियों के लिए बनने वाले फ्लैट भी नई पॉलिसी के तहत दिए जाएंगे। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक सीएचबी के पास धन की कमी नहीं है। बैंकों में बोर्ड का 900 करोड़ रुपये से ज्यादा धन जमा है, जिसका हर माह ब्याज आ रहा है। इसलिए फ्लैट बनाने में धन की कमी आड़े नहीं आएगी।



लटके हैं कई प्रोजेक्ट



सेक्टर-49 में सीएचबी ने अक्टूबर, 2005 और जनवरी, 2006 में टू-बेडरूम फ्लैटों के लिए हाउसिंग स्कीम निकाली थी। इनमें फ्लैटों के लिए लोग पूरा पैसा जमा करा चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक अपने फ्लैट नहीं मिले हैं। सेक्टर-63 में 2176 फ्लैटों के लिए मार्च, 2008 में स्कीम निकाली गई थी। इसकाड्रा निकले एक साल बीत चुका है लेकिन प्रोजेक्ट पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ।



जहां फ्लैट बनने है वहां अभी जंगल ही है। यहां तक कि इस हाउसिंग स्कीम को एन्वार्यनमेंट क्लियरेंस भी नहीं मिला है। इसके लिए हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी 22 अगस्त को दिल्ली में पर्यावरण संबंधी कमेटी को प्रेजेंटेशन दी है। यह कमेटी अब पर्यावरण मंत्रालय को रिपोर्ट भेजेगी। इसके बाद यदि एक माह तक एन्वायर्नमेंट क्लियरेंस मिलने के बाद प्रोजेक्ट पर काम शुरू होता है तो भी इसे पूरा होने में करीब डेढ़ से दो साल लगेंगे।



ताकि न हो परेशानी



सेक्टर-49 और 63 की हाउसिंग स्कीम में सीएचबी का अनुभव अच्छा नहीं रहा। डीडीए की तरह अब बोर्ड फ्लैटों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में होने पर ही लोगों से आवेदन मांगेगा। इससे लोगों को फ्लैट लेने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सेक्टर 49 और 63 की हाउसिंग स्कीम लेट होने के कारण बोर्ड की काफी बदनामी हुई है। सेक्टर-49 का प्रोजेक्ट ठेकेदार की लेटलतीफी के कारण लेट हुआ, जबकि सेक्टर-63 में एन्वायर्नमेंट क्लियरेंस में देरी के कारण काम लटका है।



संदीप कुमार, सीईओ, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड

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