...तो बल्ला नहीं रैकेट थामते सचिन
भास्कर.कॉम Tuesday, September 01, 2009 10:57 [IST]  

dddक्या आपने कभी कल्पना की है की अगर सचिन तेंदुलकर विम्बलडन में हिस्सा लेते तो उनका प्रदर्शन कैसा रहता। जी हाँ ये ख्याल बेसिरपैर का बिलकुल नहीं है क्यूंकि अगर भारत 1983 का वर्ल्ड कप नहीं जीतता तो सचिन तेंदुलकर निश्चित रूप से एक टेनिस खिलाडी होते।

24 अप्रैल 1973 को जन्मे सचिन तेंदुलकर अपने बचपन के दिनों में क्रिकेट नहीं बल्कि टेनिस के दीवाने थे। क्रिकेट से उनका परिचय तो इतना भर ही था की ये उनके बड़े भाई अजित का पसंदीदा खेल है। आज लाखों उभरते हुए क्रिकेट खिलाडियों के आदर्श सचिन उस दौर में अमेरिकी टेनिस स्टार जौन मेकेनरो को अपना आदर्श ही नहीं बल्कि भगवान् मानते थे। सचिन मेकेनरो की स्टाइल और वेशभूषा की हु-ब-हु नक़ल करते थे.खिलाडी बनने का जूनून उन्हें क्रिकेट से नहीं बल्कि टेनिस से ही मिला था।

25 जून 1983 को भारत ने जब क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीता तो पूरे देश में क्रिकेट की लोकप्रियता एकदम से बढ़ गयी। इस वर्ल्ड कप जीत से सचिन भी शिद्दत से मुतासिर हुए और उसके बाद सचिन के दिमाग में क्रिकेट बैठ गया। संयोग से अगला वर्ल्ड कप 1987 में भारत में ही हुआ जिसमे सचिन बाल बॉय बने। और चार साल बाद ही सचिन 1992 वर्ल्ड कप में भारत की तरफ से खेले।

इसी साल विम्बलडन में सचिन को विशिष्ट अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था जहाँ उन्होंने अपने बचपन के हीरो जौन मेकेनरो से मुलाक़ात की । मेकेनरो कुल 170 सप्ताह तक विश्व के नंबर एक खिलाडी रहे हैं।



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