लुधियाना. राज्य में मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री का हवाई सफर बहुत अधिक सुरक्षित नहीं है। दो दिन पहले ही उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल बाल बाल बच गए। जलालाबाद दौरे पर उनके हेलीकाप्टर को एमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। ऐसे ही एक बार पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी भाग्यशाली रहे थे। उनका हेलीकॉप्टर लैंडिंग के वक्त तारों में फंस गया था।
अब एक बार फिर सरकारी हलकों मंे मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री के हवाई सफर को अपना विमान खरीदने पर विचार शुरू हो गया है। अपने आसपास के राज्यों में सिर्फ पंजाब ही ऐसा है, जिसके सूबा प्रमुख को किराये के हेलीकाप्टर की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं। पड़ोसी राज्यों में हरियाणा सरकार के पास एक एक विमान व हेलीकाप्टर, उत्तराखंड के पास एक विमान, जम्मू कश्मीर के पास दो विमान, राजस्थान के पास दो दो विमान व हेलीकाप्टर, उत्तर प्रदेश के पास आठ विमान हैं।
पंजाब सरकार के पास भी दो विमान हुआ करते थे लेकिन दोनों ही दुर्घटनाग्रस्त हो किंग एयर सी 200 विमान के साल 1994 हादसे ने तो एक गर्वनर सरेंद्र नाथ को ही छीन लिया था। कुछ दिन पहले ही खरीदे गए विमान में गवर्नर चंडीगढ़ से चंबा जा रहे थे, तब विमान सुंदर नगर के पास क्रैश हो गया। उसके बाद पंजाब सरकार के पास सिर्फ एक विमान किंग एयर सी 90 रह गया।
इस एकमात्र विमान की हालत धीरे धीरे इतनी खस्ता हो गई कि पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसे उड़ता हुआ ताबूत कहकर इसमें उड़ान भरने से ही साफ मना कर दिया, जिसके बाद विमान को हैंगर में खड़ा कर दिया गया। पिछले साल एविएशन डिपार्टमेंट ने विमान को हैंगर से निकालकर मरम्मत करा ली। तीस साल पुराने विमान के साथ यह प्रयोग सरकार को काफी महंगा पड़ जाना था।
29 अक्टूबर को इस विमान सीएम को सफर करना था लेकिन उसी सुबह टेस्ट फ्लाइट के दौरान यह विमान लुधियाना के साहनेवाल में क्रैश हो गया जिसमें दो पायलट मारे गए। इस सनसनीखेज घटना के कारणों से आज तक पर्दा नहीं उठ पाया। फिलहाल राज्य सरकार ने करीब सात करोड़ लागत से पवन हंस कंपनी का हेलीकाप्टर लीज पर लिया हुआ है, जो आठ साल पुराना है।
सीएम व डिप्टी सीएम को अक्सर धुंध, बरसात या मौसम खराब होने पर हवाई दौरा रद्द कर सड़क मार्ग से सफर करना पड़ता है। आरामदायक सफर व सुरक्षा के मद्देनजर छह महीने पूर्व चीफ सेक्रेटरी की बैठक में सीएम के लिए नये विमान बाबत एविएशन डिपार्टमेंट के प्रस्ताव को मंजूर किया गया था। इसके लिए पंद्रह करोड़ रुपये का फंड मांगा गया लेकिन अभी तक नया विमान नहीं आ सका है।