कोलकाता. अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत रोनेन सेन ने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार के मूल में व्यावसायिक हित होने की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि इस करार के प्रभावों को देश में पूरी तरह महसूस नहीं किया गया है। सेन बुधवार को यहां नेताजी भवन में शरत बोस की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में व्याख्यान दे रहे थे।
सेन ने कहा कि इस करार के सारतत्व और इसके निहितार्थ तकनीकी और कानूनी जानकारी की भूल-भुलैया में खोगए हैं। इस करार को हमारे देश की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने और अप्रसार के लिए अमेरिका द्वारा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ साझेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।