चंडीगढ़. हरियाणा में आम विधानसभा चुनाव की नोटिफिकेशन जारी होने से सूखा राहत पैकेज की घोषणा लटक सकती है। हरियाणा में आचार संहिता लागू हो गई है। ऐसे में सूखा राहत जैसी घोषणा करना आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। पंजाब इसके लिए केंद्र से अपने लिए अलग से घोषणा करने की मांग करने जा रहा है।
काबिले गौर है कि मानसून की औसतन आधी बारिश भी न होने के बावजूद पंजाब और हरियाणा के किसानों ने भूजल का प्रयोग करके अपनी फसल तो बचा ली है लेकिन इसके लिए उन्हें डीजल आदि पर भारी खर्च करना पड़ा है। राज्य सरकारों ने अन्य राज्यों से महंगी बिजली खरीदकर खेती सेक्टर को दी है। फसल को बचाने के लिए घरेलू और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर भारी कर कट लगाकर धान की फसल को बचाया गया। अब समस्या यह है कि ये दोनों राज्य सूखा की परिभाषा से बाहर हो गए हैं। इसलिए केंद्र सरकार से इन राज्यों ने सूखा राहत पैकेज देने की मांग की है।
केंद्रीय कृषि विभाग और योजना आयोग के बीच इन दिनों राहत पैकेज को लेकर बैठकों का सिलसिला चल रहा है। इन बैठकों में पंजाब और हरियाणा को अलग से पैकेज देने की बात अंतिम चरण में है। लेकिन इसी बीच हरियाणा में आम विधान सभा चुनाव की घोषणा होने से पंजाब का मामला भी बीच में लटक गया है। पंजाब के कृषि विभाग ने केंद्र से राज्य के केस पर अलग से विचार करने को कहा है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से 3130 करोड़ रुपए का पैकेज मांगा हुआ है। हालांकि राजनीतिक तौर पर अकाली भाजपा विधायकों ने कृषि मंत्री को 7174 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग की है।
सोमवार के बजाय मंगलवार से बढे़गी बिजली की दरें
पंजाब में बिजली की दरों का नया टैरिफ ऑर्डर अब सोमवार के बजाय मंगलवार को जारी किया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बराड़ के निधन के चलते यह फैसला लिया गया है। रज्य सरकार ने भी उनके निधन के कारण सोमवार की छुट्टी का ऐलान किया है।