नई दिल्ली. देश के बेहद मशहूर विश्वविद्यालय जेएनयू में पढ़ने वाले छात्रों की जान भी सुरक्षित नहीं है। इसका ताजा उदाहरण एम टेक के छात्र ऐश्वर्य अग्रवाल की मौत है। दमे से पीड़ित इस छात्र को अगर कैंपस में प्राथमिक उपचार मिल जाता तो शायद आज वह जिंदा रहता।
ऐश्वर्य के सीनियर विक्रम सिंह ने बताया कि बुधवार रात करीब 10.30 बजे उसे दमे का अटैक आया। उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए तुरंत कैंपस में उपलब्ध एम्बुलेंस को बुलाया गया। लेकिन आधे घंटे बाद एंबुलेंस के नाम पर पहुंची उस गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर तो गायब था ही, प्राथमिक उपचार के नाम पर भी कुछ नहीं था।
विक्रम ने बताया कि ऐश्वर्य को लेकर एम्स पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। छात्र ऐश्वर्य की मौत के लिए सीधे तौर पर विश्वविद्यालय में उपलब्ध खस्ताहाल स्वास्थ्य सुविधाओं को जिम्मेदार बता रहे हैं।
प्रशासन से मामले की शिकायत करने पर जवाब मिला कि कुछ औपचारिकताओं के चलते 24 घंटे स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजाम कर पाने में परेशानी हो रही है। विश्वविद्यालय के रेक्टर आर कुमार ने दुर्घटना की जानकारी होने और उम्दा सुविधा का इंतजाम जल्द करने की बात कही। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार वी के जैन ने छात्र की मौत पर दुख जताया और खस्ताहाल स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का आश्वासन दिया।