अब स्टूडेंट्स यह ब्रांच लेने से कतरा रहे हैं। उनका रुख कन्वेंशनल ब्रांचेज की ओर बढ़ा है। इससे इंस्टीट्यूट्स में आईटी ब्रांच में सीटें खाली हैं, जबकि कन्वेंशनल ब्रांचेज में सीटें लगभग फुल हो गई हैं। इंस्टीट्यूट के संचालक इसकी मुख्य वजह रिसेशन को मानते हैं। रिसेशन का सबसे ज्यादा असर आईटी कंपनियों पर देखा गया। सबसे ज्यादा नुकसान आईटी इंजीनियरों को उठाना पड़ा। इस वक्त में कोर इंजीनियर्स खुद को सरवाइव करने में कामयाब रहे। इसके मद्देनजर पेरेंट्स और स्टूडेंट्स यह ब्रांच लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। दूसरी ओर, स्टूडेंट्स की इंस्टीट्यूट्स को लेकर भी मानसिकता में भी बदलाव आया है। अभी तक वे होमटाउन के आस पास स्थित इंस्टीटयूट को प्रायॉरिटी देते थे। अब उनके लिए होमटाउन से ज्यादा बेस्ट इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेना ज्यादा जरूरी हो गया है। इसके लिए जयपुर को सबसे बेहतर ऑप्शन माना जा रहा है। मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल ब्रांच का ग्राफ बढ़ा आरटीयू के कंप्यूटर साइंस और आईटी ब्रांच के करिकुलम में ज्यादा अंतर नहीं है। रिसेशन में सबसे ज्यादा नौकरियां आईटी सैक्टर से गई थीं। जिसका असर स्टूडेंट्स पर भी देखा गया है। जेसीईआरसी के डायरेक्टर अर्पित अग्रवाल ने बताया, वे आईटी ब्रांच को अवॉइड कर रहे हैं। मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल का ग्राफ बढ़ा है। इसी तरह स्टूडेंट्स जयपुर में अन्य कोर्सेज की तैयारी अच्छे होने के कारण यहां एडमिशन लेना पसंद कर रहे हैं। यहां प्लेसमेंट कंपनियां भी अन्य शहरों के इंस्टीट्यूट्स की तुलना में अच्छी आती हैं। आजकल जयपुर फस्र्ट, कोटा सैकंड, जोधपुर थर्ड और उदयपुर फोर्थ नंबर पर है।
स्टूडेंट्स का रुझान मॉडर्न ब्रांचेज के प्रति घट रहा है। इंस्टीट्यूट के लिए जयपुर जैसे बड़े शहरों को फस्र्ट प्रॉयरिटी दी जा रही है। आरपीईटी की काउंसलिंग के दौरान यह ट्रेंड सामने आया है। अभी तक काउंसलिंग में स्टूडेंट्स इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ब्रांच को फस्र्ट प्रायॉरिटी देते थे। इस ब्रांच में एडमिशन लेना उनके लिए एक सपना होता था। इसमें एडमिशन के लिए वे लाखों रुपए खर्च करने तैयार रहते थे। इस बार ऐसा नहीं है।