लुधियाना. देश की पहली नेशनल बास्केटबॉल चैंपियनशिप 1951 को लुधियाना में हुई। उस जमाने में ये चैंपियनशिप मड कोर्ट (मिट्टी का फ्लोर) पर हुईं थी। आज ये वही लुधियाना है जिसने मिट्टी से शुरुआत कर इंटरनेशनल स्टेंडर्ड के बास्केटबॉल कोर्ट पर कदम रख लिया है। जी हां, देश के इकलौते लुधियाना (गुरु नानक स्टेडियम में) स्थित इंडोर बास्केटबॉल हॉल को अब इंटरनेशनल स्टेंडर्ड का मेनटेन किया जा रहा है।
इकलौता इसलिए क्योंकि देश में जितने भी इंडोर हॉल बनाए गए हैं वह मल्टीपर्पज यूज के लिए हैं लेकिन यहां पर बना इंडोर हॉल सिर्फ बास्केटबॉल के लिए है। बास्केटबॉल इंडोर हॉल में किए गए चेंजेस अब इंटरनेशनल लेवल की गेम्स के लिए बिल्कुल परफैक्ट हैं।
इस कोर्ट को तैयार करने में लगभग 30 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। जिसे की मैपल वुड (कैनेडियन लकड़ी) से तैयार किया गया है। पंजाब बास्केटबॉल के इतिहास में इस बदलाव को लेकर इंटरनेशनल खेल चुके प्लेयर्स बहुत खुश हैं और अपकमिंग प्लेयर्स के लिए इसे बहुत अच्छा बता रहे हैं।
इंटरनेशनल स्टेंडर्ड समझ आएगा
इंडियन बास्केबॉल टीम में प्वाइंट गर्ड एंड शूटिंग गर्ड पर खेलने वाले प्लेयर तलविंदर जीत साही ने बताया कि मैं 6 साल से बास्केटबॉल खेल रहा हूं और पिछले 4 साल से देश के लिए खेल रहा हूं और इस दौरान मैंने गेम के सिलसिले में 25 देशों का दौरा किया है। अपकमिंग प्लेयर्स के लिए ये बहुत बड़ी बात है कि लुधियाना में ये इंटरनेशनल स्टेंडर्ड का कोर्ट बनाया गया है हम तो सीमेंट के कोर्ट पर ही खेल-खेल करही यहां तक पहुंचे हैं।
यहां से सीखने वाले प्लेयर्स को आगे जाकर आसानी होगी क्योंकि जो प्लेयर इस कोर्ट पर प्रैक्ट्सि करेगा तो उसे इंरटनेशनल स्टेंडर्ड को समझने में भी दिक्कत नहीं होगी। मैं बहुत कंट्रीज में घूमा हूं लेकिन मुझे सबसे बढ़िया बास्केटबॉल कोर्ट बीजिंग(चीन) का लगा है। मैं खुश हूं अब मुझे भी प्रैक्ट्सि के लिए यहां पर मैपल वुड का कोर्ट का मिल गया है।
प्लेयर्स के लिए बड़ी बात
2007,08 में इंडियन बास्केटबॉल टीम के कैप्टन रह चुके और अब टीम सेंटर पोस्ट पर खेलने वाले जगदीप सिंह ने बताया कि जब हम सीमेंट के फ्लोर पर खेलते हैं फिर हमें एकदम से वुडैन फ्लोर पर खेलना पड़ता है तो कई बार हम वहां पर खुद को एडजस्ट नहीं कर पाते हैं जिसके चलते हम बढ़िया परफॉर्म भी नहीं कर पाते हैं।
मैं जब पहली 2002 में चीन में खेलने गया तो मुझे भी मैपल वुड के कोर्ट पर खेलना पड़ा लेकिन मेरे लिए तब ये फ्लोर नया था और मैं वहां पर खुद को एडजस्ट नहीं कर पाया था। अगर इस नजरिए से देखा जाए तो यह प्लेयर्स के लिए बहुत बड़ी बात है कि उन्हें पंजाब में इंटरनेशनल स्टेंडर्ड के कोर्ट पर खेलने को मिल रहा है।
ये अच्छी शुरुआत है
पंजाब बास्केटबॉल ऐसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी तेजा सिंह धालीवाल का कहना है कि अपकमिंग प्लेयर्स के लिए ये एक बहुत अच्छी शुरुआत है। जहां एक और प्लेयर्स को इंटरनेशनल प्लेयिंग फैसिलटी मिल रही है वहीं उनकी इंजरी के चांसेज भी बहुत कम हो जाएगें। दो चीजें इंटरनेशन प्लेयिंग में आती हैं एक तो कोर्ट और दूसरा डंकिंग रिंग, ये दोनो ही फैसिलटीज हमारे इंटरनेशनल स्टेंडर्ड की हैं।
बस इस कोर्ट की पॉलिशिंग बाकी रह गई है जो बहुत जल्द करवा दी जाएगी। इसके अलावा लुधियाना में बने इंडोर हॉल में स्ट्ड लाइट्स भी इंटरनेशनल स्टेंडर्ड की लगाई जा रही है इसके अलावा और भी बहुत सारे चेंजेस किए जा रहे हैं। इंडोर हॉल में किए गए चेंजेस से अब यह इंटरनेशनल लेवल की गेम्स के लिए बिल्कुल परफैक्ट कोर्ट बन गया है।
क्या खास है मैपल वुड से तैयार हुए बास्केटबॉल कोर्ट में
मैपल वुड एक खास किस्म की लकड़ी। दुनियाभर में जितने भी बास्केटबॉल कोर्ट हैं वह इसी लकड़ी से तैयार किए गए हैं। मैपल वुड कैनेडियन लकड़ी है जिसे अमेरिका के जरिए यहां मंगवाया जाता है। इस लकड़ी के साथ कोर्ट (फ्लोर)को इस ढंग से तैयार किया जाता है कि इंजरी के चासेंज 95 परसेंट कम हो जाते हैं।
जब भी कोई प्लेयर इस कोर्ट पर जंप करता है तो यह कोर्ट प्लेयर को ऊपर की ओर पुश करता है। यह कोर्ट स्लाइडिंग होता है खेलते वक्त अगर प्लेयर इस कोर्ट पर गिरता भी है तो वह स्लाइड करता आगे निकल जाता है और वह चोट से बच जाता है। यह खासियत है देश के इस इकलौते मैपल वुड से तैयार हुए बास्केटबॉल इंडोर कोर्ट की।