लुधियाना. नई सोच, नए जोश और नई उमंग के साथ लक्ष्य को साधने की एकाग्रता, यही है इन युवाओं की शक्ति। इनके चेहरे की चमक बता रही थी कि यह लक्ष्य को साध कर ही दम लेंगे। हम बात कर रहे हैं शहर के गर्वनमेंट कालेज फॉर ब्वायज में श्री अजरुन शूटिंग अकादमी में निशानेबाजी की कला को सीख रहे शहर के कुछ होनहार युवाओं की।
यह युवा भी देश की झोली में पहला ओलंपिक सोना डालने वाले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की तरह भारत का नाम दुनियाभर में रोशन करना चाहते हैं। इन्होंने अब तक कई कई मेडल जीते हैं और अब नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप की तैयारी में हैं।
सोना लाना है मुझे
नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में भाग ले चुकी और इस अकादमी की ट्रेनी किरणजीत कौर कहती हैं कि मैं इस बार नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में सोना लाने को तैयार हूं। मैं एक दिन इंटरनेशनल स्तर पर देश का नाम रोशन करूंगी और इसके लिए अभी से मैंने लक्ष्य को साधना शुरू कर दिया है।
बचपन से था शौक
ग्यारहवीं की छात्रा और इस अकादमी की ट्रेनी परनूर ग्रेवाल कहती हैं कि बचपन से ही मुझे निशानेबाजी का शौक रहा। अब इस शौक में मैं अपने करियर भी तलाश कर रही हूं। अब तक मैंने पंजाब इंटर स्कूल जूनियर चैंपियनशिप में दो गोल्ड, ओपन एयर अमृतसर शूटिंग में दो गोल्ड, डिस्ट्रिक्ट शूटिंग चैंपियनशिप में दो गोल्ड और पंजाब इंटर स्कूल शूटिंग चैंपियनशिप में 1 सिल्वर हासिल किया है।
इसके साथ ही इस अकादमी की ट्रेनी गुरलीत कौर ने भी विभिन्न चैंपियनशिप में दो गोल्ड, 1 सिल्वर व एक कांस्य जीता है। ट्रेनी अदिति और जसप्रीत सिंह ने कहा कि निशानेबाजी में ही नाम कमाने के लिए दिन रात प्रेक्टिस में लगे हुए हैं।
तैयार हैं हमारे ट्रेनी
इस अकादमी की प्रमोटर व सेंट्रल एक्साइज की इंस्पेक्टर बलविंदर कौर कहती हैं कि इस अकादमी में बच्चों को एयर राइफल शूटिंग और पिस्टल शूटिंग की ट्रेनिंग दी जाती है। सभी स्टूडेंट्स ने नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में क्वालीफाई कर लिया है, अब इंतजार है सोना लाने का। अकादमी के कोच गुरजीत सिंह कहते हैं कि शूटिंग गेम एक्यूरेसी व स्पीड का खेल है।
यह गेम हथियार के टाइप पर भी निर्भर है। इसमें हैंड गन, शॉट गन, सबमशीन गन, 3—गन का इस्तेमाल किया जाता है। कई चरणों में गेम की ट्रेनिंग दी जाती है। इस गेम में युवा ही नहीं बच्चे भी आ रहे हैं। इस गेम में कोई उम्र की सीमा नहीं है। 11 साल की उम्र से अधिक कोई भी इस गेम को सीख सकता है।