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Friday, September 18, 2009 17:23 [IST]  

danik bhaskarभावनाओं का तड़का,जिद का छक्का.बोल हड़िप्पा

Rajesh Yadav

निर्देशक : अनुराग सिंहप्रोडच्यूसर : आदित्य चोपड़ाकलाकार :शाहिद कपूर, रानी मुखर्जी,अनुपम खेर,दिलीप ताहिल, राखी सावंत, शर्लिन चोपड़ा, पूनम ढिल्लन, ब्रजेश हिरजे संगीत : प्रीतम गीतकार : जयदीप साहनी बैनर : यशराज

दिल बोले हड़िप्पा यशराज फिल्म की एक और शानदार फिल्म है जिसमें देशप्रेम, सपनों को पूरे करने की जिद और और प्यार भरें रिश्तों की कहानी है। फिल्म दर्शकों का दिल जीतने वाली है। फिल्म में क्रिकेट के खेल के माध्यम से जहां एक तरफ चैंपियन बनने की दास्तान है वही अमन का संदेश देने का प्रयास भी। एक ऐसी फिल्म जो कहती है हमें एक जिंदगी मिलती है ,अपने सपनों को पूरा करने के लिए, प्यार भरें रिश्तों को जीने के लिए । फिल्म कहती है जिंदगी के इस खेल में चैंपियन बनकर जीना ही जिंदगी की जीत है। इस बेहतरीन फिल्म के लिए निर्देशक अनुराग सिंह साधुवाद के पात्र है और रानी मुखर्जी के लिए यह फिल्म संजीवनी की तरह है।

फिल्म में वीरा कौर (रानी मुखर्जी) एक ऐसी गांव की लड़की बनी है जो सचिन और धोनी के साथ क्रिकेट खेलने का सपना देखती है। एक दिन ऐसा भी आता है कि वह अपने इस सपने को पूरा करने के लिए वीरा कौर से वीर नामक सरदार बनकर अमृतसर की एक स्थानिय टीम में शामिल हो जाती है। इस टीम के कप्तान रोहन (शाहिद कपूर) अपने पिता (अनुपम खेर)का सपना पूरा करने के लिए पाकिस्तान की एक स्थानीय टीम को मात देना चाहते है। सबसे खास बात फिल्म में टी 20 का मैच दिलचस्प अंदाज में दिखाया गया है और वीर और रोहन द्वारा पाक टीम को हराने के लिए किए गया प्रयास उम्दा है। दो दोस्तों की टीम के बीच अमन के लिए खेला जाने वाला मैच बहुत दिलचस्प होता है।

पूरी फिल्म में रानी मुखर्जी और शाहिद कपूर का अभिनय शानदार रहा है। रानी ने संवाद बोलने, डांसिग और सरदार बॉय के रुप अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही है।राखी सावंत और शर्लिन चोपड़ा ने बिंदास काम किया है। वहीं अनुपम खेर, दिलीप ताहिल और पूनम ढिल्लन ने भावनात्मक रोल में बेहतर काम किया है।

फिल्म की कहानी, सवांद और पटकथा लेखन के लिए जया -अपराजिता ने बहुत शानदार मेहनत की है। कुछ संवाद तो बहुत ही बेहतरीन है। प्रीतम का संगीत उम्दा है और जयदीप साहनी के लिखे गीत के बोल अपना जादू दिखाने में कामयाब है। फिल्म में बीच बीच में कुछ पुरानी फिल्मों के गीतों के मुखड़ों का फिल्मांकन लाजबाब रहा है। क्रिकेट के खेल का जादू हम भारतीयों पर कुछ खास ही चलता है और दिल बोले हडिप्पा उस जादू को बरकरार रखने में कामयाब रही है।

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विचार:

Monti Parasar

Thursday, 24th Sep 2009, 18:20
I don't understand how the way film critics analyse a film. To appreciate a film like 'Dil Bole Hadippa' is completly absurd. This film contains emotional-bomting,over darma,old screen ply.There is nothing impressive in this movie. It seems that critics are totally biased for this film.Please don't do that,thses king of film artical looses viewers trust on film critics.

Ravi

Friday, 2nd Oct 2009, 17:50
This is a bad analysis of this film.I don't know why you are saying "शानदार फिल्म".It's only time pass.

mohinder jeet

Friday, 23rd Oct 2009, 8:00
I THINK ITS JUST TIME PASS MOVIE

apne vichaar
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