विशेष. पंडित सुशील तिवारी व पंडित रामराज के मुताबिक नवरात्रों में प्रतिदिन दस वर्ष तक की कन्या की पूजा करनी चाहिए। क्योंकि शास्त्रों में दो वर्ष की कन्या को कौमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच की रोहिणी, छह वर्ष की कालिका, सात वर्ष तक की चंडिका, आठ वर्ष तक की शाम्भवी और नौ वर्ष की कन्या दुर्गा व दस वर्ष की सुभद्रा कही गई हैं। नौ कन्याओं की प्रतिदिन पूजा करें अन्यथा एक कन्या की पूजा तो अवश्य की जाए..
नारी एक है, पर उसके रूप अनेक हैं। हर रूप में उसकी अलग महिमा है और हर रूप में पूजनीय है। मां के रूप में जन्नत उसके चरणों में होती है। मां की ममता, प्यार का दुलार कोई कभी नहीं भूलता। एक मां ही होती है जो अपने बच्चों पर ममता लुटाती है। मां की महिमा को शब्दों में नहीं व्यक्त किया जा सकता। नारी के जितने भी रूप हैं, उनका अपना महत्व है, यदि मां के रूप में वह वंदनीय है तो दूसरे रूपों में भी उसका महत्व है। यही वजह है कि वैदिक काल में नारी पूजा प्रचलित थी। नवरात्र महोत्सव भी देवीरूप में उसकी पूजा का अवसर है। भगवान श्रीराम ने देवी के आशीर्वाद से लंका फतह की थी, तभी से नवरात्र महोत्सव मनाया जाने लगा।
होती मनोकामना पूर्ण
नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने का प्रावधान है। श्रद्धाभक्ति से जो मां के इन रूपों की पूजा अर्चना करता है, उसकी सभी मनोमकामनाएं पूरी होती हैं। नौ दिन कन्या पूजन से मां भगवती प्रसन्न होती हैं। पंडित ऋषभ शर्मा के मुताबिक शास्त्रों में वर्णित है कि जो मां दुर्गा की पूजा करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
शारदीय नवरात्र : घोड़ा है सवारी
पंडित रामराज कौशिक के अनुसार घट स्थापना का मुहूर्त19 सिंतबर को कन्या लग्न में सुबह साढ़े छह बजे से आठ बजकर 46 मिनट तक है। कौशिक के अनुसार अबके शारदीय नवरात्र इस बार शनिवार से प्रारम्भ हो रहे हंै। इसलिए देवी का आगमन घोड़े पर हो रहा है। इसका फल भी अलग-अलग मिलेगा।
पूजा भी, पाप भी
एक तरफ हमारा समाज कन्या को देवी मान उसकी पूजा करता है, तो यह सत्य है कि आज गर्भ में ही बेटी को मारने जैसा घिनौना काम भी हो रहा है, बेशक इसे कानूनी रूप से जुर्म घोषित कर दिया है, लेकिन चोरी छिपे यह जारी है। श्रीकृष्ण संग्रहालय के डिप्टी डायरेक्टर राजेश पुरोहित के मुताबिक विश्व के किसी और देश में ऐसा देखने को नहीं मिलता। पश्चिमी देशों में बेटा-बेटी एक समान माने जाते हैं, जबकि महान संस्कृति व सभ्यता और गौरवमयी इतिहास रखने वाले भारत में यह घिनौनी सोच पनपी।
भ्रूण हत्या महापाप
हमारे धर्मग्रंथों में स्पष्ट वर्णित है कि भ्रूण हत्या करने वाला महापापी होता है। पंडित रामराज कौशिक के अनुसार ब्रrावैवर्तपुराण में वर्णित है कि गर्भघ्नश्च महापापी
सम्प्रापनोति शुनीमुखम अर्थात भ्रूण हत्या करने वाले रोध और नरक में जाते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार गर्भ में कन्या भ्रूण हत्या करने वाला, गांव को नष्ट करने वाला, गौ को मारने वाला महापापी रोध, नरक के भागी होते हैं।
श्राद्तर्पण वर्जित
नारदपुराण, ब्रrापुराण के अनुसार भ्रूण हत्या करने वाले को वंशवृद्धि नहीं होती। ऐसे पुरुष या स्त्री के मरने पर उसके शव से स्पर्श करना, दाह संस्कार करना, श्राद्धतर्पण करना भी महापाप माना है। देवी भागवत पुराण अध्याय 9-34 श्लोक 27-28 के अनुसार कन्या का गर्भपात करने वाले स्त्री पुरुष अगले जन्म गिद्ध, कौआ, सर्प, सुअर की योनि में जाता है, फिर बैल होने के बाद कोढ़ी मनुष्य होता है। गरुड़पुराण व मनुस्मृति में कन्या भ्रूण हत्या करने वाले के हाथ से जल भी ग्रहण नहीं करना चाहिए।
यूं करें घट स्थापना
प्रात: काल उठकर स्नान कर प्रतिपदा को सुबह कन्या लग्न में घर के ईशान कोण में जौ बीज कर कलश की स्थापना करें। पानी वाला नारियल लाल वस्त्र में लपेट कर उस पर रखंे। इसके उपरांत गणोश,अंबिका व कलश पूजन करें और मां दुर्गा का पाठ करें। पंडित रामराज के मुताबिक मात्र नवार्ण मंत्र का जाप कर मनवांछित फल मिलता है। यह मंत्र है ऊं ऐं हीं कलीं चामुण्डायै विच्चे।
ये रखें सावधानी
नवरात्र महोत्सव पूजा विधि अनुसार ही फलदायी होती है। घर में देवी की तीन प्रतिमाएं न हों, तुलसी, आंवला व दुर्वा का प्रयोग न करें। दुर्गा उपासना गीले वस्त्रों से न करें, लाल सुगंधित फूल ही अर्पित करें, मंदिर की एक परिक्रमा करें। मां से रक्षा की याचना करें और केश खुले रख कर पूजा करना वर्जित है।
ज्यादा प्यारी बेटियां
कुरुक्षेत्र वासी चंपावती परिवर्तित नाम कहती हैं कि उनकी चार लड़कियां हैं, उन्हें याद है कि किस तरह परिवार की तरफ से उन पर दबाव डाला जाता था कि लिंग जांच करा, यदि कन्या है तो गर्भपात कराए, लेकिन उसने कभी उनका कहा नहीं माना, आज उनकी चार लड़कियां हैं और एक पुत्र, लेकिन बेटे से ज्यादा प्यारी उन्हें अपनी बेटियां हैं, क्योंकि इनके जन्म के साथ ही उसके घर में खुशियां बढ़ती गई। चारों लड़कियां पढ़ाई में भी आगे हैं, पर लड़का बमुश्किल दसवीं तक पहुंचा, दसवीं भी उससे नहीं हो पाई।
योतिसर निवासी अनु पत्नी पवन देवगन बताती हैं कि वे यही चाहते थे कि उनकी पहली संतान लड़की हो, भगवान से वे यही प्रार्थना करते थे, देवी मां ने उनकी सुनी, उनकी पहली संतान लड़की है। उन्हें अपनी फूल जैसी नन्हीं परी से बेहद प्यार है। पटेल नगर वासी रमा शर्मा बताती हैं कि उनके परिवार में 20 साल बाद लड़की हुई। पूरा परिवार उस पर अपना दुलार लुटाता है।