नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पकड़ा गया शीर्ष माओवादी नेता कोबाड़ गांधी यहां नक्सली ठिकाना स्थापित करने आया था। झारखंड पुलिस की सूचना पर दिल्ली व आंध्र पुलिस के संयुक्त दल ने सोमवार को उसे गिरफ्तार किया था।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कोबाड़ ज्यादा से ज्यादा लोगों को संगठन से जोड़ना चाहता था। उसका लक्ष्य शहरी इलाकों में संगठन का प्रभाव बनाना था। इसके लिए वह विंग कोबाड़ गांधी प्रकाशन का भी सहारा लेता था। पब्लिकेशन के जरिए वह शहरी इलाकों में लोगों को संगठन की उपलब्धियों की जानकारी देता था और उन्हें सदस्य बनने के लिए आकषिर्त करता था। मुंबई के पारसी परिवार में पैदा हुए कोबाड़ ने प्रारंभिक शिक्षादून स्कूल से प्राप्त की।
इसके बाद उसने मुंबई के एलफिंस्टन कॉलेज में दाखिला लिया। वहां से पढा़ई पूरी करने के बाद उसने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा की डिग्री हासिल की थी। नक्सल गतिविधियों से उसकी प्रतिबद्धता इस कदर थी कि विदेश में पढ़ाई करने के बावजूद वह आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ व उड़ीसा के जंगलों में रहता था।
13 शीर्ष सदस्यों में से एक : भाकपा (माओवादी) के शीर्ष 13 सदस्यों में से एक कोबाड़ के पास संगठन की प्रकाशन शाखा और इसके ग्रामीण इलाकों के प्रचार-प्रसार का जिम्मा था।
पत्नी भी थी सक्रिय : कोबाड़ उन शहरी युवाओं में शामिल था, जिन्होंने सशस्त्र क्रांति की अलख जगाने के लिए गांवों का रुख किया था। कोबाड़ और उसकी पत्नी अनुराधा नक्सली आंदोलन से जुड़े रहे। अनुराधा का संबंध भी कर्नाटक के रईस परिवार से था। अनुराधा की कुछ माह पहले ही मलेरिया से मौत हुई है। सूत्रों के अनुसार कोबाड़ के परिवार का मुंबई के वर्ली सी फेस में एंटीक फर्नीचर का व्यवसय है। इसके पास महाबलेश्वर में एक आइसक्रीम पार्लर और एक रिजॉर्ट भी है।
6 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रहेगा
कोबाड़ गांधी को मंगलवार को तीस हजारी की चीफ मेट्रोपोलिटेन मजिस्ट्रेट कावेरी बावेजा की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने कोबाड़ की न्यायिक हिरासत को ६ अक्टूबर तक बढ़ा दी। अदालत में पेश करने से पहले ६३ वर्षीय कोबाड़ ने दिल की बीमारी की शिकायत की थी। इसलिए पेशी से पहले उसका मेडिकल चेकअप कराया गया।