Jodhpur
इस बार था बदला बदला सा माहौल
भास्कर न्यूज Thursday, September 24, 2009 06:46 [IST]  

जोधपुर. जोधपुर का कार्यकर्ता तत्वनिष्ठ है, व्यक्तिनिष्ठ नहीं..पार्टी ने जो किया उस पर कोई सवाल नहीं उठ सकता। हमारी पार्टी सिद्धांतों वाली पार्टी है, जसवंतसिंह जी कल हमारे नेता थे..अब पार्टी ने निकाल दिया तो नेता नहीं रहे..। कुछ इस तरह की बातचीत हो रही थी बुधवार शाम सोजतीगेट स्थित भाजपा शहर जिला कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों में।



वाजपेयी सरकार में महत्वपूर्ण ओहदों पर रहे जसवंतसिंह जब कभी जोधपुर आते थे तो बीजेपी के आम कार्यकर्ता से लगाकर एमएलए एमपी तक उनके स्वागत में पलक पांवड़े बिछा देते थे, लेकिन बुधवार को नजारा उससे कुछ उलट था। कालवी प्याऊ के पास पार्टी के एकाध पूर्व पदाधिकारी सहित सिर्फ एक समाज के लोग मौजूद थे, ठीक उसी समय पार्टी कार्यालय में बैठे कार्यकर्ता उन पर टिप्पणियां कर रहे थे।



सदस्यता अभियान चला रहे हैं



वैसे तो चुनावों के बाद कम ही खुला रहता है, लेकिन 16 अगस्त से शुरू हुए सदस्यता अभियान के चलते कार्यालय में इन दिनों सुबह 10.30 बजे से शाम 8 बजे तक कोई न कोई कार्यकर्ता रहता है। बुधवार शाम भास्कर टीम ने करीब डेढ़ घंटा इस कार्यालय में गुजारा तथा कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों की बातचीत का जायजा लिया।



सदस्यता अभियान के चलते कार्यालय में भाजपा के शहर जिला उपाध्यक्ष अशोक व्यास जमीन पर बिछे हुए गद्दे पर बैठे थे। उनके आसपास त्रिपोलिया मंडल महामंत्री गजेन्द्र आचार्य, मंडल उपाध्यक्ष मनोज बोहरा, चुनाव मोर्चा उपाध्यक्ष नौशाद अंसारी, वार्ड संख्या 32 के समद खां तथा 29 के कार्यकर्ता संदीप आचार्य मौजूद थे।



अध्यक्षजी बीमार है



कार्यालय में मौजूद उपाध्यक्ष व्यास से अध्यक्ष के बारे में पूछा तो उन्होंने पहले कहा कि अहमदाबाद गए हुए हैं, उनके नंबर पूछे तो कहा शायद वापस आ गए होंगे, घर पर हैं, बीमार हैं इसलिए बाहर नहीं निकल रहे हैं। एक कार्यकर्ता बोल उठा, पिछली बार जब शेखावत आए थे तब भी कई पदाधिकारी बीमार हो गए थे। वैसे जसवंतसिंहजी ने किया तो गलत ही था, एक अन्य कार्यकर्ता बोल उठा।



तीसरे ने पूछा, क्या गलत किया। पहला फिर बोला जिन्ना के बारे में नहीं लिखना चाहिए था। क्या लिखा था? पहला फिर बोला, यह तो नहीं मालूम..इस पर व्यास ने पहले कार्यकर्ता की तरफ मुखातिब हो कर बोला कि भारत के विभाजन में पंडित नेहरू की प्रधानमंत्री बनने की स्वार्थ भावना तथा जिन्ना का दुराग्रह था..फिर सिंह ने गलत क्या लिखा, दूसरे कार्यकर्ता ने पूछा..गलत यह था कि उन्होंने पटेल के बारे में टिप्पणी की, पटेल नहीं होते तो शायद जोधपुर सहित हैदराबाद व कुछ अन्य रियासतें भारत में नहीं होती..यह तो ठीक है..पहला बोला।



भाई साहब बलराज मधोक, वीरेन्द्र कुमार संखलेचा, मदनलाल खुराणा व उमा भारती जैसे भी चले गए, पार्टी का क्या बिगड़ा...पहले ने कहा, पार्टी इसीलिए केंद्र में सत्ता में नहीं है..। सेंटर की छोड़ो...एमपी में दुबारा जीते, गुजरात में भी जीते..। वसुंधरा मामले में आपका क्या कहना है..व्यास ने हंसते हुए कहा वह अभी मेडिकल लीव में है.।

 
 


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