लंदन. अंग्रेज ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने खुलासा किया है कि मुंबई आतंकी हमले के बाद वे टेस्ट क्रिकेट सीरीज खेलने के लिए भारत दौरे पर नहीं लौटना चाहते थे, लेकिन ईसीबी ने दबाव डालकर उन्हें वापस भेजा। ‘फ्रेडी’ के अनुसार, ईसीबी का यह दबाव धनवान भारतीय बोर्ड की नाराजगी से बचने के लिए था। राष्ट्रीय अनुबंध को ठुकराकर फ्रीलांस क्रिकेटर बने फ्लिंटॉफ ने अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘एशेज टू एशेज’ में ईसीबी (इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड) को खिलाड़ियों को नीचा दिखाने के लिए आड़े हाथों लिया है।
उनकी ऑटोबायोग्राफी के अंश ‘डेली मेल’ ने प्रकाशित किए हैं।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष जब इंग्लैंड की टीम भारत में वनडे सीरीज खेल रही थी, उसी दौरान 26 नवंबर को मुंबई में आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद इंग्लिश टीम सीरीज अधूरा छोड़कर स्वदेश लौट गई थी। बाद में वह टेस्ट सीरीज के खेलने भारत लौटी थी।
टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह चुके फ्लिंटॉफ के मुताबिक वनडे सीरीज अधूरा छोड़ने के बाद वे और उनके कुछ साथी खिलाड़ी भारत दौरे पर नहीं लौटना चाहते थे। उन्होंने कहा, ‘..तब ईसीबी ने हमसे कहा कि यदि हम भारत खेलने नहीं गए, तो उसे बड़ी आर्थिक क्षति होगी, जिसका काउंटी व ग्रासरूट क्रिकेट पर बुरा असर होगा। मूलत: वे कह रहे थे कि यदि हम घर लौटे, तो कई युवा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे।’
उन्होने कहा, ‘मैं शुरू से ही मानता रहा हूं कि हम पर दबाव डालना गलत था, लेकिन ईसीबी ने बीसीसीआई से अच्छे संबंध बनाने के लिए ऐसा किया। आईपीएल की कामयाबी के बाद तो कोई भी बीसीसीआई से नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता। ईसीबी भी दूसरों से अलग नहीं है।’