लुधियाना. ग्यासपुरा में अनाधिकृत निर्माण को लेकर चर्चा में आई कालोनी अब सरकार की नजर से बच नहीं सकती। स्थानीय निकाय विभाग ने नगर निगम को कालोनी निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। कालोनी के निर्माण के पीछे एक कद्दावर अकाली नेता के ‘आशीर्वाद’ की चर्चाएं शुरू से ही उठती रही हैं।
स्थानीय निकाय विभाग के विजिलेंस सेल के चीफ विजिलेंस अफसर एके प्रभाकर की ओर से निगम कमिश्नर को भेजे गए पत्र नंबर सीवीओ-09/1448 में उक्त कालोनी के खिलाफ पंजाब म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 1976 की धारा 240 के तहत कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। कार्रवाई करने को लेकर उन्होंने स्थानीय निकाय मंत्री मनोरंजन कालिया के आदेश का हवाला दिया है।
इसके अलावा अनाधिकृत कालोनी बनाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलेपमेंट अथॉरिटी (ग्लाडा) के मुख्य प्रशासक को भी लिखने के लिए कहा गया है। सरकार के पास अवैध कालोनी निर्माण की शिकायत पिछले साल सितंबर में पहुंची थी, जिसके बाद सरकार ने निगम से रिपोर्ट तलब की थी।
उसके जवाब में निगम के म्युनिसिपल टाउन प्लानर ने 31 अक्टूबर को रिपोर्ट भेजकर बताया था कि कालोनी के निर्माण को लेकर किसी तरह की मंजूरी नहीं ली गई। निर्माण पूरी तरह से अवैध हैं। उसके बाद से ही स्थानीय निकाय विभाग की ओर से कार्रवाई को लेकर निगम को लिखा गया, लेकिन सियासी दबाव के कारण मामले को रफा-दफा करने का प्रयास भी किया गया।
उसी दबाव के कारण ही निगम उस पर कोई कार्रवाई न कर सका। अलबत्ता, निगम अधिकारियों की ओर से कालोनी का निर्माण निगम हद से बाहर होने की दलीलें ही दी जाती रहीं। कोई परिणाम न निकलता देख 5 जून को स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों ने कालिया को पत्र लिखकर सारे मामले की जानकारी दी। सियासी दबाव के कारण कोई एक्शन न होने के बारे में बताकर दिशा निर्देश देने के लिए कहा गया।
इसी सिलसिले में इसी माह तीन तारीख को कालिया ने कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए। अब पीएमसी एक्ट की जिस धारा के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, उसके तहत कालोनी में हो चुके अवैध निर्माण तोड़ने, कालोनी में बनाई गई सड़कें और सीवरेज सिस्टम तक तोड़े जाने का प्रावधान है।
इसके अलावा एफआईआर तक दर्ज करवाई जा सकती है। जानकारों का कहना है कि कालोनी निर्माण करने से पहले मंजूरी लेना अनिवार्य है, लेकिन टैक्स बचाने के चक्कर में ऐसे निर्माण धड़ल्ले से किए जाते हैं।