सोल. जापान की किमिको दाते क्रुम ने आज यहां कोरिया ओपन टेनिस टूर्नामेंट के फाइनल में स्पेन की एनाबेल मेदिना गैरिगेज को लगातार सेटों में हराकर गत 13 वर्षो में अपना पहला डब्ल्यूटीए खिताब जीत लिया। दुनिया में चौथे नंबर की खिलाड़ी रह चुकी किमिको ने दूसरी वरीयता प्राप्त एनाबेल को 6-3, 6-3 से हराकर खिताबी जीत दर्ज कर ली। उन्होंने एनाबेल पर शुरू से ही दबाव बना लिया और फिर कभी भी उबरने का मौका नहीं दिया।
इस जीत से किमिको ने 13 वर्षो से चल रहा अपना खिताबी सूखा समाप्त कर लिया। उन्होंने पिछला खिताब वर्ष १९९६ में सैन डिएगो टूर्नामेंट में अरांता सांचेज विकारियो को हराकर जीता था। हालांकि इसके बाद वह करीब 12 वर्षो तक टेनिस कोर्ट से दूर ही रहीं और कुछ महीनों पहले ही उन्होंने फिर से खेलना शुरू किया है। अब कुछ दिनों बाद ही वह अपना 31वां जन्मदिन मनाने जा रहीं हैं। अपना आठवां डब्ल्यूटीए खिताब जीतने से खुश किमिको ने कहा अब मैं 31 साल की होने जा रही हूं। ऐसे में फाइनल खेलते समय मुझ पर किसी भी तरह का दबाव नहीं था। वैसे इमानदारी से कहूं तो मुझे खुद नहीं पता कि इस उम्र में भी खेलते रहने की ऊर्जा मेरे भीतर कहां से आती है।
वैसे कि मिको के नाम से आज के खेलप्रेमी अपरिचित हो सकते हैं लेकिन नब्बे के दशक के मध्य में वह अपने कैरियर के शिखर पर थीं। उस समय वह दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों में शुमार की जाती थीं। वर्ष 1996 तो उनके कैरियर का सुनहरा साल था। वह न सिर्फ अटलांटा ओलंपिक के क्वार्टरफाइनल तक पहुंची थी बल्कि विंबलडन के सेमीफाइनल तक भी पहुंचने में सफल रही थीं।