Vichaar
संप्रभुता मनुष्य की सर्वोच्च् नियति है
Bhaskar News Monday, September 28, 2009 00:53 [IST]  

Bhagat Singhशहीद भगतसिंह विचारों से भी क्रांतिकारी थे। महज 23 साल की उम्र में देश के लिए जान न्योछावर करने वाले भगतसिंह ने जेल के दौरान लिखी डायरियों में ऐसे कई क्रांतिकारी विचार व्यक्त किए थे जो आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी 102वीं जयंती के उपलक्ष्य में पेश हैं कुछ ऐसे ही विचार:

< क्रांति का मतलब रक्तपात नहीं है और न ही इसका मतलब व्यक्तिगत बैर-भाव रखना है। यह बम और पिस्तौल पर भरोसा करने वाले लोगों का भी समूह नहीं है। क्रांति का मतलब यही है कि अन्याय पर आधारित व्यवस्था को जरूर बदलना चाहिए।

< क्रांति मानवजाति का ऐसा अधिकार है जिससे उसे कभी भी अलग नहीं किया जा सकता है, स्वतंत्रता जन्मसिद्ध अधिकार है और संप्रभुता उसकी सर्वोच्च नियति है।

< सबसे पहले अपने व्यक्तिवाद को खत्म करें, व्यक्तिगत सुविधाओं में रहने के सपने से बाहर आएं। अब आगे बढ़ें। आगे बढ़ने के लिए साहस और दृढ़ता की जरूरत होगी। तुम्हें किसी भी कठिनाई और मुसीबत से हतोत्साहित नहीं होना है, कोई भी विफलता या विश्वासघात तुम्हें विचलित नहीं कर सकता। इतनी कठिनाइयों व त्याग के बाद तुम विजेता के रूप में ही उभरोगे।

< मैं भी महत्वाकांक्षाओं और उम्मीदों से भरा हूं, मैं भी आकर्षक जिंदगी जीना चाहता हूं, लेकिन मैं जरूरत के समय इन सभी को छोड़ भी सकता हूं और यही वास्तव में त्याग और कुर्बानी है।

< जब ताकत का इस्तेमाल हमलावर के रूप में किया जाता है तो यह हिंसा है और इसलिए यह अन्यायपूर्ण है। लेकिन जब इसका इस्तेमाल एक उचित कारण से किया जाता है तो वह न्यायसंगत है। इसलिए ताकत का पूरी तरह उन्मूलन अव्यावहारिक है।

 
 


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