गौरतलब है कि 19वीं शताब्दी में यूरोप और अमेरिका में आवाज को रिकॉर्ड करने के कई प्रयास हुए थे, हालांकि इसे सफलता के साथ थॉमस एडिसन ने 1877 में पूरा किया। एडिसन के फोनोग्राफ यंत्र को आवाज रिकॉर्ड करने के प्रयास में मील का पत्थर माना जाता है। 1877 से अब तक रिकॉर्डिग इंडस्ट्री ने व्यापक बदलाव देखे हैं और इन्हीं बदलावों के बीच ऑडियो इंजीनियरिंग के कॅरियर ने मूर्त रूप लिया है। ऑडियो इंजीनियरिंग के अंतर्गत कई विषय आते हैं, जिनको चुना जा सकता है। आप स्टूडियो इंजीनियर, साउंड रिकॉर्डिस्ट, ब्रॉडकास्ट इंजीनियर, साउंड एडिटर, री-रिकॉर्डिग, डायलॉग एडिटर, म्यूजिक एडिटर, साउंड इफेक्ट्स एडिटर, मास्टरिंग इंजीनियर, मिक्सिंग इंजीनियर, रिकॉर्डिग इंजीनियर, साउंड इंजीनियर और स्टूडियो मैनेजर बतौर कार्य कर सकते हैं। फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणो राजस्थान यूनिवर्सिटी, जयपुर
हर शख्स संगीत का शौकीन होता है। बदलते दौर में इसे संगीत के प्रति दिलचस्पी को कॅरियर का रूप भी दिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी नहीं कि आप गायक, संगीतकार या गीतकार बनकर ही इस क्षेत्र से जुड़ें।
क्या है यह
ऑडियो इंजीनियरिंग, ऑडियो साइंस की ही एक शाखा है। यह उन लोगों की पसंद हो सकता है जिनकी रुचि संगीत में है और जो इस विशाल इंडस्ट्री का हिस्सा बनना चाहते हैं। ऑडियो इंजीनियरिंग आवाज को समझना, रिकॉर्डिग, कॉपी करना, एडिटिंग, मिक्सिंग और फिर इलेक्ट्रॉनिक या मेकेनिकल यंत्रों से इसे सुनने लायक मधुर आवाज में सामने लाने का कार्य है। इसे दो भागों में बांट सकते हैं-प्रोडक्शन और पोस्ट प्रोडक्शन।
प्रोडक्शन-ध्वनि की मूल रिकॉर्डिग के अलावा बारीक से बारीक उतार-चढ़ाव को साउंड इंजीनियर्स विभिन्न यंत्रों के माध्यम से रिकॉर्ड करते हैं। विभिन्न तरह के स्विच, डायल, लाइट और मीटर से युक्त इलेक्ट्रॉनिक मिक्सिंग बोर्ड (कंसोल बोर्ड) ध्वनि को रिकॉर्ड करने और एडिटिंग के काम में महती भूमिका निभाते हैं।
पोस्ट प्रोडक्शन-इस प्रक्रिया में रिकॉर्ड की हुई ध्वनि को पॉलिश कर और बेहतर बनाया जाता है। डिजिटल ऑडियो वर्क स्टेशन, सिग्नल प्रोसेसर, सीक्वेंसिंग सॉफ्टवेयर सरीखे उपकरण इस कार्य के लिए जरूरी हैं।
कार्य का स्वरूप
ऑडियो इंजीनियर के पास मूल ध्वनि को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक तब्दीली करने का अनुभव और दक्षता होती है। ऑडियोग्राफी और साउंड रिकॉर्डिग का कोर्स किए व्यक्ति ऑडियो इंजीनियर बन सकते हैं। मोटे तौर पर समझें तो जो संगीत हम सुनते हैं, उसे कर्णप्रिय बनाने का काम इन्हीं के जिम्मे होता है। गाने की धुन, वीडियो का बैकग्राउंड स्कोर, फिल्म की आवाज और विज्ञापन के बोल को अंतिम रूप ऑडियो इंजीनियर देते हैं। इन्हें रिकॉर्डिग या साउंड इंजीनियर्स भी कह सकते हैं।
योग्यता
सफल ऑडियो इंजीनियर बनने के लिए ऑडियोग्राफी, साउंड रिकॉर्डिग, साउंड इंजीनियरिंग या ऑडियो इंजीनियरिंग की डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करना आवश्यक है। इसके अलावा किसी खास तरह की शिक्षा की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन फिजिक्स और मैथ्स की जानकारी ऑडियो इंजीनियर्स को फायदा पहुंचा सकती है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग व फाइन आर्ट्स की पृष्ठभूमि वाले भी इस कॅरियर को अपना सकते हैं।
व्यक्तिगत कुशलता
इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने के इच्छुक लोगों की संगीत में रुचि होना सबसे ज्यादा जरूरी है। इनका कलात्मक, तकनीकी रूप से सक्षम और इलेक्ट्रिकल व मेकेनिकल उपकरणों पर कार्य करने से लगाव होना चाहिए। संगीत से जुड़ा कोई भी काम टीम के साथ मिलकर किया जाने वाला कार्य है। ऐसे में संप्रेषण में निपुणता और टीम भावना होनी जरूरी है।
इनके काम के घंटे लंबे हो सकते हैं, अत: इस बात के लिए तैयार रहें। एकाग्रता, धीरज, संगीत में पिच, टाइमिंग और रिदम की सही समझ होना होना ऑडियो इंजीनियर के लिए जरूरी है। इन्हें रिकॉर्डिग के के अलग-अलग माध्यमों मसलन एनालॉग टेप,डिजिटल मल्टी ट्रैक रिकॉर्डर, वर्क स्टेशन और कंप्यूटर की अच्छी जानकारी होनी चाहिए।
रोजगार के अवसर
इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए डिग्री या डिप्लोमा कोर्स के बाद फिल्म, टीवी, विज्ञापन, ब्रॉडकास्टिंग, लाइव कार्यक्रम, मल्टीमीडिया संस्थाओं और सीडी प्रोडक्शन का कार्य किया जा सकता है। लेकिन ऑडियो इंजीनियर्स के लिए सबसे आकर्षक शाखा म्यूजिक इंडस्ट्री है। असिस्टेंट से शुरू करके अनुभव के साथ ऑडियो इंजीनियर बना जा सकता है।
एक और बेहतर विकल्प स्टूडियो में माइक्रोफोन, मिक्सर, सॉफ्टवेयर, साउंड-म्यूजिक-स्पीच रिकॉर्डिग का है। साउंड, म्यूजिक, डायलॉग, स्पेशल इफेक्ट्स में विशेषज्ञता हासिल कर म्यूजिक प्रोडच्यूसर बनकर अपना रिकॉर्डिग स्टूडियो खोलना भी एक विकल्प है। इसके अलावा ऑडियो इंजीनियर फ्रीलांसर के तौर पर भी काम कर सकते हैं।
काम का व्यापक दायरा
पारिश्रमिक
इस क्षेत्र में मेहनत और काम के अनुरूप पारिश्रमिक और नाम दोनों मिलते हैं। आपके काम की पैठ बन गई है तो धीरे-धीरे पारिश्रमिक भी बढ़ता जाता है। ऑडियो इंजीनियर्स को शुरुआती तौर पर दस हजार रुपए या उससे ज्यादा पारिश्रमिक मिल सकता है। जबकि विदेश में इस स्तर से शुरुआत का आंकड़ा और भी अच्छा है।
कोर्स करवाने वाले संस्थान
एडीएमईसी, नई दिल्लीडॉ
हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर
रूपम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स, जयपुर