Vichaar
लाखों लोगों की बदल दी जिंदगी
Bhaskar News Tuesday, September 29, 2009 00:54 [IST]  

Dr. Bindeshwar Pathakसुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक को मैला उठाने वाले लाखों लोगों का जीवन बदलने का श्रेय जाता है। वर्ष 1970 में ‘सुलभ सैनिटेशन मूवमेंट’ शुरू करने वाले पाठक की संस्था से आज 50 हजार से भी ज्यादा कार्यकर्ता जुड़े हैं जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक घर में टॉयलेट का निर्माण करवाना है।

2 अप्रैल 1943 को बिहार के रामपुर में जन्मे डॉ. बिंदेश्वर पाठक 1968 में बिहार गांधी शताब्दी समारोह समिति से जुड़े जहां उन्हें मैला उठाने वाले लोगों की मुसीबतों का एहसास हुआ। यहीं से उन्होंने ऐसे लोगों के लिए काम करने का फैसला किया। लेकिन वे जानते थे कि समस्या के समाधान के लिए उन्हें कुछ ठोस चीज पेश करनी होगी। वर्ष 1970 में वे सुलभ तकनीकी के साथ आगे आए।

यह इतनी सरल व सस्ती थी कि इससे कच्चे टॉयलेटों को सुलभ शौचालयों में बदलना आसान हो गया। सुलभ इंटरनेशनल के प्रयासों के फलस्वरूप अब तक दस लाख कच्चे टॉयलेटों को सुलभ शौचालयों में बदला जा सका है जिसकी वजह से मैला ढोने वाले 50 हजार से भी अधिक लोगों को इस कार्य से मुक्त करने में सफलता मिली है। सुलभ इंटरनेशनल ने 1100 शहरों व कस्बों में साढ़े पांच हजार से अधिक सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करवाया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने दुनिया के गरीब और विकासशील देशों के तीन अरब लोगों के लिए सुलभ तकनीकी को अपनाने की अनुशंसा की है।

पाठक ने मैला उठाने के कार्य से मुक्त हुए लोगों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र भी खोले। उन्होंने ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम के स्कूल भी शुरू किए हैं। पाठक को देश-विदेश के कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है। हाल ही में प्रतिष्ठित टाइम मैग्जीन ने उन्हें एनवायरनमेंट हीरो 2001 चुना है।

 
 


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