लुधियाना. जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन (जेएन’नूरम) की शर्तो को पूरा करने और सुधारों को लागू करने के मामले में केंद्र सरकार पंजाब से खुश नहीं है। पंजाब सरकार किसी न किसी बहाने इन्हें टालती रही है। अब मामला गंभीर होता देख राज्य सरकार इन पर सोचने को मजबूर है।
इस संबंध में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अध्यक्षता में मंगलवार को चंडीगढ़ में होने वाली स्टेट लेवल स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय अर्से से पंजाब सरकार को योजना का लाभ हासिल करने के लिए शर्तो और सुधारों को लागू करने के लिए चेताता आ रहा है।
पहले जिला परिषद व पंचायत चुनाव, फिर लोकसभा चुनाव और उसके बाद विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर राज्य सरकार केंद्र की ताकीद पर अमल करने से पीछा छुड़ाती रही है। विकास के लिए फंड हासिल करने के लिए अब इन्हें लागू करने के संकेत मिल रहे हैं।
बैठक में जेएन’नूरम के लिए हुए मैमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट की शर्तो के तहत सुधारों को लागू करने पर फैसले लिए जाने की संभावना है। ऐसा न करने की सूरत में लुधियाना और अमृतसर में चल रहे कई अहम प्रोजेक्ट्स प्रभावित होंगे। असल में एग्रीमेंट के मुताबिक 2007-2008 में लागू किए जाने वाले पांच सुधारों पर भी अमल नहीं हो पाया है।
इनमें एमपीसी का गठन, सिटी डेवलेपमेंट प्लान के मुताबिक शहरी योजना कार्यक्रम बनाने, पब्लिक डिसक्लॉजर लॉ और कम्युनिटी पार्टिसिपेशन लॉ को कानून का रूप देना प्रमुख तौर पर शामिल हैं। इनके अलावा कुछ अन्य सुधार हासिल करने का लक्ष्य भी पूरा नहीं किया जा सका।
केंद्र सरकार इसलिए भी खफा है क्योंकि 2008—2009 में लागू किए जाने वाले सात वैकल्पिक सुधारों में से महज तीन को ही हासिल किया जा सका है, लेकिन उसकी औपचारिक रूप से जानकारी भी मिशन निदेशालय को नहीं भेजी गई है। अमृतसर और लुधियाना में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लक्ष्य को भी हासिल नहीं किया जा सका है।
मंजूरी के बाद भी शुरू न हुए प्रोजेक्ट
लुधियाना और अमृतसर में मंजूर हो चुके पांच प्रोजेक्ट्स में से तीन प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जिन पर काम ही शुरू नहीं हो सका। इनमें से अमृतसर का सीवरेज प्रोजेक्ट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट तथा लुधियाना का सीवरेज प्रोजेक्ट शामिल है। लुधियाना सीवरेज प्रोजेक्ट की बात करें तो इस योजना के तहत 243 करोड़ रुपए की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूर हुई थी।
उसमें से पहली किश्त के तौर पर करीब 25 फीसदी ग्रांट केंद्र जारी कर चुका है। डीपीआर मंजूर होने पर नगर निगम प्रशासन अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते रहे, लेकिन वह प्रोजेक्ट अधर में ही लटके हुए हैं। राज्य में 125 वर्ग गज तक की रिहायशी प्रॉपर्टी को पानी-सीवरेज की दी गई माफी भी सरकार वापस नहीं ले सकी है।
हालांकि यह चार्जेज लगाने के लिए सरकार ने सैद्धांतिक तौर पर फैसला तो ले लिया था, लेकिन लागू करने के लिए हिम्मत नहीं जुटा सकी। लुधियाना नगर निगम में जहां तक जिन सुधारों को लागू करने की बात है उनमें हाउस टैक्स में दी गई छूट वापस लेनी, डबल एंट्री सिस्टम, ई गवर्नेस, बिल्डिंग प्लान को जल्द मंजूरी देनी, पानी सीवरेज चार्जेज की छूट वापस लेनी और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट शामिल है।
सुधरने के लिए दबाव
मुफ्त रियायतें बंद करने और सुधार लागू करने पर केंद्र का दबाव।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में होने वाली बैठक अहम।