इस तरह के दावों का निपटारा अदालतों में लंबा समय लेता है, अत: संभावना है कि अदालत के बाहर दोनों पक्ष समझौता कर लेंगे। यह भी संभव है कि पूंजी निवेशक को अच्छी खासी रकम मिल जाए। अगर ऐसा होता है तो फिल्म से प्राप्त होने वाली यह एकमात्र राशि होगी, क्योंकि फिल्म असफल हो चुकी है। इस अनापेक्षित स्रोत के बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा। अभी यह सिर्फ एक संभावना है, उतनी ही अविश्वसनीय जितनी की फिल्म की कहानी। कई बार दुर्घटनाओं के घने बादलों में चांदी की लकीर दिखाई देती है। इस प्रकरण का दुखद पहलू यह है कि वीडियो चोरों का गिरोह बहुत पहुंचा हुआ है। आज शूटिंग के बाद संपादन, विशेष प्रभाव, ध्वनि, पुन:मुद्रण आदि सारे कामों में टेक्नोलॉजी का जमकर प्रयोग होता है और पेन ड्राइव जैसी छोटी सी चीज में पूरी फिल्म का मास्टर प्रिंट कहीं भी ले जाया जा सकता है। टेक्नोलॉजी के लाभ के साथ यह हानि भी जुड़ी हुई है। टेक्नोलॉजी गर्भवती सर्पणी की तरह प्रसव के बाद भूख के कारण अपने ही अंडे खा जाती है। असफल फिल्म से भी कभी-कभी अनापेक्षित स्रोत आय देते हैं। अमित खन्ना देव आनंद के लिए काम करते थे। उन्होंने ‘देस परदेस’ की नायिका टीना मुनीम (अंबानी) और देव आनंद के साथ जॉर्ज बनार्ड शॉ के नाटक से प्रेरित फिल्म बनाई थी, जिसके अद्भुत गीत अमित खन्ना ने ही लिखे थे। इस असफलता के वर्षो बाद टीना और अनिल अंबानी का विवाह हुआ और उनकी कंपनी में मोटे वेतन पर अमित खन्ना की नियुक्ति हुई और आज उनकी कंपनी में वह उच्चतम अधिकारी हैं। ‘मन पसंद’ फिल्म की लागत का हजार गुना धन अमित खन्ना अपने उस संपर्क के कारण कमा चुके हैं। अत: कुछ मामलों में दर्शक फिल्म का भाग्यविधाता नहीं होता है। अमित खन्ना ने नहीं सोचा था कि फिल्म असफल होगी और न ही उन्होंने टीना के संपर्क से अपने सौभाग्य की कल्पना की थी। कारपोरेट की भागमभाग में फिल्म उद्योग ने अमित खन्ना के रूप में एक प्रतिभाशाली गीतकार खो दिया। प्रसून जोशी से पहले प्रसून वाली गुणवत्ता अमित खन्ना दिखा चुके हैं। विजय आनंद मेडिकल व्यवसाय में मूल्यों के संकट पर बनाई अपनी असफल फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ में अपने अभिनय के लिए सराहे गए और उन्हें ‘कोरा कागज’ तथा ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ में नायक के रूप में सफलता मिली। फिल्म का घाटा अभिनय से निकल गया। ऊपरवाले की पटकथा में असफल फिल्मों से भी सफलता और समृद्धि के रास्ते खुल जाते हैं और कई बार सफलता प्रतिभा को लील जाती है, मसलन ‘शोले’ के बाद न रमेश सिप्पी कोई सफल फिल्म बना पाए, ना ही उनके पिता जीपी सिप्पी।
प्रदर्शन के सात दिन पूर्व मुंबई पुलिस ने वीडियो चोरों के गिरोह से ‘वॉट्स योर राशि’ का मास्टर प्रिंट जब्त किया। एक लेबोरेटरी का उच्चधिकारी भी कथित तौर पर इसमें शामिल माना गया है। सुना है कि ‘वॉट्स योर राशि’ की पूंजी निवेशक कंपनी यूटीवी उस लेबोरेटरी पर सौ करोड़ का दावा ठोंकने वाली है। ज्ञातव्य है कि यह लेबोरेटरी एक अत्यंत धनाढ्य कारपोरेट संस्था का हिस्सा है।