Vichaar
संपादकीय -- दंभ का प्रदर्शन न बने शक्ति पूजन
Bhaskar News Wednesday, September 30, 2009 01:41 [IST]  

Editorialविजयादशमी पर भोपाल में शस्त्र पूजा कार्यक्रम के बाद गोली चलने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। विजयादशमी पर रावण दहन के साथ ही शस्त्र पूजन की भी परंपरा रही है। रावण दहन जहां असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है, वहीं शस्त्र पूजन शक्ति संचय व उसके समाजहित में उपयोग का।

शस्त्र पूजन की परंपरा अब पूजा तक सीमित न होकर शस्त्रों के सार्वजनिक प्रदर्शन तक विस्तार पा चुकी है। शस्त्रों का प्रदर्शन व उपयोग धार्मिक परंपराओं से परे सामाजिक व राजनीतिक आयोजनों में भी खुलकर होने लगा है। शादी-ब्याह से लेकर राजनेताओं के स्वागत में हवाई फायर की घटनाएं अब आम हो चली हैं।

शस्त्रों के सार्वजनिक प्रदर्शन व उपयोग की वैधानिकता पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस पर रोक लगाने की कोशिश कभी नहीं हुई। शस्त्र पूजा जहां ईश्वर के प्रति आस्था व नैतिक बल पाने पर जोर देती है, तो शस्त्र प्रदर्शन व हवाई फायर जैसी घटनाओं में अहंकार के साथ शक्ति प्रदर्शन की अभिव्यक्ति होती है, जो समाज में उन्माद और भय का वातावरण निर्मित करने का सबब बन सकती है। शक्ति प्रदर्शन के लिए शस्त्रों का उपयोग समाज में अपनी प्रभुता, दबंगता और श्रेष्ठता प्रदर्शित करने की सामंती प्रवृत्ति का परिचायक होता है। आत्मरक्षा के लिए भी शस्त्रों का प्रयोग वैधानिकता के दायरे में ही किया जा सकता है।

परतंत्रता के दौर में आतताइयों से मुकाबला करने के लिए शस्त्रों के उपयोग की अपनी प्रासंगिकता रही है जिसमें धर्म, समाज और राष्ट्र की रक्षा का भाव सर्वोपरि रहा है। इस भाव के साथ शक्ति प्रदर्शन समाज में विश्वास जगाता है अन्यथा वह भय पैदा करने का कारक बनता है। दरअसल परंपरा या उत्साह के नाम पर इस तरह के शक्ति प्रदर्शन, जो वैधानिक सीमाओं को लांघते हों, पर पुन: विचार करने की जरूरत है कि इससे समाज का हित-अहित कितना प्रभावित होता है।

अब शस्त्र पूजा के रूप में आस्था और शस्त्रों के माध्यम से शक्ति प्रदर्शन के दंभ को एक साथ नहीं देखते हुए दंभ पर आस्था की विजय की अवधारणा विकसित करने की पहल की जानी चाहिए ताकि भयमुक्त समाज के निर्माण की प्रक्रिया को गति मिले। भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र में रक्षा का दायित्व निर्वाचित सरकारों का होता है। समाज या व्यक्ति की रक्षा के लिए शक्ति प्रदर्शन की परंपरा यदि कानून और विधान का उल्लंघन करती है तो कानून का राज ही सुरक्षा की गारंटी दे सकता है।

 
 


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