Jodhpur
पार्टी की जिम्मेदारी निभाने को तैयार : शेखावत
भास्कर न्यूज Wednesday, September 30, 2009 07:00 [IST]  

जोधपुर. पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने खुद को राजनीति में सक्रिय बताते हुए कहा कि वे पार्टी की कोई भी जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं। उनका मानना है कि निलंबन से जसवंतसिंह को नुकसान हुआ है, भारतीय जनता पार्टी तो पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। शेखावत ने गहलोत सरकार पर निशाना लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान से सटी सीमा से विस्फोटक व हथियार आने से स्पष्ट है कि राजस्थान की सरहद सुरक्षित नहीं है।



सरकार तस्करों और राष्ट्रविरोधी ताकतों से निपटने में गंभीर नहीं है। लालकृष्ण आडवाणी के राजनीति से सन्यास लेने के संकेत देने के बाद चल रही अटकलों के बीच भैरोसिंह शेखावत ने मंगलवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा वे उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने के बाद से भाजपा के साथ हैं और सक्रिय राजनीति कर रहे हैं।



एक सवाल के जवाब में शेखावत ने कहा कि लोगों को उनसे बड़ी उम्मीद है तो वे उन्हें मायूस नहीं करेंगे। पार्टी कोई जिम्मेदारी देती है तो वे उसे निभाने को तैयार हैं। जबकि लोकसभा चुनाव से पूर्व जोधपुर से भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने के दौरान शेखावत भाजपा से कोई नाता न होने की बात कह चुके हैं। उन्होंने जसवंतसिंह के पार्टी से निलंबन को सही बताते हुए कहा कि उनके जाने से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ा।



आपसी खींचतान और लोगों का आना जाना चलता रहता है। भाजपा मजबूत राष्ट्रीय पार्टी है और रही बात प्रदेश भाजपा की तो वसुंधरा राजे के प्रतिपक्ष नेता पद से इस्तीफे से पार्टी का माहौल और अच्छा होगा।



जसवंतसिंह चाहे कुछ भी कहे



शेखावत ने उन्हें पूर्वाग्रह से ग्रसित बताने के जसवंतसिंह के बयान पर कहा कि वे चाहे कुछ भी कहें, अब क्या फर्क पड़ता है। भ्रष्टाचार की मुहिम के बारे में उनका कहना था, इसी वजह से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से पार्टी ने इस्तीफा मांग लिया था। उनके इस्तीफा नहीं देने के सवाल पर, शेखावत बोले, यह तो पार्टी जाने।



अराजकता व महंगाई, फिर कैसा राज



अशोक गहलोत के कार्यकाल के सवाल पर वे पत्रकारों से ही पूछने लगे, आप ही बताएं, अराजकता व महंगाई सिर चढ़कर बोल रहे हों तो फिर राज कैसा। बॉर्डर पर विस्फोटक व हथियारों की जखीरे आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं भी मुख्यमंत्री रहा, मगर क्या मजाल इस तरह राष्ट्रविरोधी ताकतों और तस्करों को शह मिल जाए।



हालात क्या हैं आप खुद अंदाजा लगा लीजिए। राजस्थान से सटी सीमा की सुरक्षा में सुराख हो गए, लेकिन सरकार इस संवेदनशील मसले को गंभीरता से नहीं ले रही है। राजनीतिक दबाव में आरोपियों को बचाने के प्रयास चल रहे हैं। वे खुद पाकिस्तान की सटी सीमा का दौरा कर हालात का जायजा लेंगे।

 
 


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: