Jodhpur
जैसलमेर के डेजर्ट में बसेंगे अफ्रीकन चीते
विकास आर्य Sunday, October 04, 2009 05:06 [IST]  

cheetaजोधपुर. अफ्रीका से भारत लाए जा रहे चीतों को जैसलमेर रोड स्थित मोकला और सोनू गांव के बीच करीब 1000 वर्ग किमी. डेजर्ट एरिया में छोड़ा जाएगा। चीतों के भोजन की फूड चेन बनाने के लिए सरकार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से हिरणों व नील गायों को यहां लाकर छोड़ेगी।

राज्य सरकार ने इस जगह का सर्वे करवा लिया है। इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। जैसलमेर का डेजर्ट नेशनल पार्क कई कारणों से चीतों को बसाने के उपयुक्त नहीं माना जा रहा। राज्य पक्षी गोडावण का प्रमुख आश्रय स्थल होने के साथ ही यहां चीतों के फूड चेन की समस्या भी है।

आस —पास हो रही सैन्य गतिविधियों के कारण भी यह स्थान चीतों के लिए मुफीद नहीं है। ऐसे में सरकार ने मोकला और सोनू के थार इलाके को चीतों की प्रजाति बढ़ाने का उपयुक्त स्थान माना है। गिरदावरी की रिपोर्ट के अनुसार मोकला व सोनू गांव के बीच करीब एक हजार वर्ग किमी. क्षेत्र के आस—पास 8135 लोग रहते हैं। इनके पास 31 हजार 827 पशुधन है जबकि 4367 हैक्टेयर भूमि पर वे काश्त करते हैं।

फूड चेन के लिए कई प्रयास होंगे चीतों को फूड चेन उपलब्ध कराने के लिए राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से हिरण और नील गाय लाकर इन्हें मोकला व सोनू एरिया के बीच छोड़ा जाएगा। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव पाए जाते हैं। पर्याप्त रूप से चीतों की फूड चेन बनाने के लिए जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, गंगानगर, बाड़मेर, हनुमानगढ़, चूरू आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नील गाय और हिरण लाकर इस इलाके में छोड़े जाएंगे।

व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहे हैं

चीतों को लाने से पहले व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। चीतों को देखने के लिए विशेष व्यवस्था होगी, इससे पर्यटक अनुमति लेकर ही आ पाएंगे।

राजन माथुर, मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव राजस्थान

बातचीत चल रही है भारत सरकार से बात चल रही है। राजस्थान से सर्वे रिपोर्ट आने के बाद उस जगह का सर्वे होगा।

डॉ. एमके रंजीत सिंह, चेयरमैन वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया

20—25 वाटर पाइंट बनेंगे

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चीतों को यहां छोड़ने से पहले इस एरिया में 25—25 वाटर पाइंट बनाए जाएंगे। यहां विचरण करने वाले वन्य जीव इन वाटर पाइंट पर पानी पीने के लिए आएंगे वहीं चीतों को भी भोजन की तलाश में इधर—उधर भटकना नहीं पड़ेगा। यहां विभिन्न प्रजातियों के पेड़ भी लगाए जाएंगे।

डीएनपी एरिया में चीतों को छोड़ने पर कई समस्याएं आ रही हैं। मोकला व सोनू एरिया चीतों के लिए अनुकूल है। यहां सर्वे हो गया, रिपोर्ट भेजने की तैयारी चल रही है।

आरएन मेहरोत्रा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजस्थान

 
 


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