उज्जैन. अमूमन गांव वालों को कम समझदार माना जाता है लेकिन उज्जैन के एक ऐसा भी गांव है जहां के ग्रामीणों ने पानी की बूंद-बूंद के उपयोग का संकल्प लेते हुए संदेश दिया है आपसी तालमेल आज की सबसे बड़ी जरूरत है। मध्यप्रदेश सहित मालवांचल में भीषण जलसंकट से जूझ चुके लोग थोड़ी अच्छी बारिश होने के बाद बेफिक्र हो गए हैं।
सरकारी मशीनरी का तो कहना ही क्या, आलम यह है कि तालाबों और जलाशयों का पानी लगातार कम हो रहा है। ऐसे में उज्जैन के नजदीकी गांव कचनारिया के सैकड़ों ग्रामीणों ने तय किया है कि वे भैसाखेड़ी तालाब के पानी से खेतों की सिंचाई इस तरह करेंगे कि एक बूंद पानी व्यर्थ नहीं जाएगा। इसके लिए ग्रामीणों ने सिंचाई मैनेजमेंट का प्लान भी बनाया है।
जिस किसान की जमीन अधिक होगी, उसे उसी अनुपात में पानी दिया जाएगा। इसके लिए बकायदा पंच भी बनाए गए हैं। कचनारिया के इन ग्रामीणों ने पूरे प्रदेश को पैगाम दिया है कि संकट की घड़ी में मिलजुलकर आपसी समन्वय से काम किया जाए तो मुश्किल काम भी आसान हो सकता है। एक तालाब, तीन हजार किसान: कचनारिया के तीन हजार लोगों के बीच खेतों की सिंचाई के लिए एकमात्र भैसाखेड़ी तालाब है।
इसमें वर्तमान में 1.10 मिलियन घन मीटर पानी स्टोरेज है। यही तालाब किसानों की फसलों का आधार है। समिति करेगी पानी का वितरण हम सभी गांव वालों ने तय किया है कि पानी की एक-एक बूंद का सदुपयोग करें। इसके लिए बारी-बारी से सिंचाई के लिए तालाब के पानी का वितरण किया जाएगा। यह काम एक समिति के जिम्मे रहेगा। समिति तय करेगी कि किस खेत में कितना पानी देना है। उद्देश्य है सभी को जरूरत के हिसाब से बराबर पानी मिले। - आनंदीलाल सरिया, अध्यक्ष जल उपयोगिता समिति कचनारिया
जलसंकट से बचने की दिशा में यह बेहतर पहल है। इससे पानी वितरण का बेहतर मैनेजमेंट होगा। यह सभी के लिए पैगाम होगा कि मिल-जुलकर किया गया काम कितना बेहतर होता है। - अजातशत्रु, कलेक्टर, उज्जैन