Ujjain
शिप्रा-गंभीर का पानी संरक्षित
भास्कर संवाददाता Sunday, October 04, 2009 09:09 [IST]  

उज्जैन. एक महत्वपूर्ण फैसले में जिला प्रशासन ने शिप्रा और गंभीर डेम के पानी को संरक्षित घोषित किया है। शिप्रा और डेम के पानी का सिंचाई और औद्योगिक कार्यो में उपयोग नहीं किया जा सकेगा। इस बार भी जिले में बारिश औसत से कम होने से अगली गर्मी में जलसंकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसे देखते हुए कलेक्टर अजातशत्रु ने शिप्रा और गंभीर डेम में पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू किया है।



अधिनियम 1986 की धारा 04 के तहत गंभीर डेम और शिप्रा का पानी सिंचाई व औद्योगिक उपयोग के लिए प्रतिबंधित रहेगा। यह आदेश लागू होने पर नगर निगम आयुक्त व संबंधित एसडीएम निगरानी करेंगे कि डेम और नदी का पानी केवल घरेलू उपयोग के लिए ही हो।



आदेश का उल्लंघन होने पर दो साल का कारावास या दो हजार रुपए का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। शनिवार से जारी आदेश 30 जून 2010 तक लागू रहेगा। अन्य डेमों को भी संरक्षित घोषित करने की तैयारी है।



इसलिए लिया निर्णय: उज्जैन, घट्टिया, बड़नगर, तहसीलों के गांवों के किसानों द्वारा गंभीर व शिप्रा से सीधे अवैध पंपिंग कर सिंचाई की जाती है। इससे जल भंडारों के खाली होने का डर है और जलसंकट हो सकता है।



तालाबों से अवैध सिंचाई पर रोक: एक अन्य फैसले के तहत कलेक्टर अजातशत्रु ने जिले के सभी तालाबों से अवैध सिंचाई पर रोक लगा दी है। शनिवार शाम बृहस्पति भवन में आयोजित जल उपयोगिता समिति की बैठक के दौरान विभिन्न समिति अध्यक्षों की सहमति से यह निर्णय लिया गया। अवैध सिंचाई रोकने के लिए मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को सख्त हिदायत दी है कि तालाबों के आसपास किसी को भी विद्युत कनेक्शन नहीं दिए जाएं।



जिम्मेदारों को ही जानकारी नहीं



उज्जैन. जो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) गंभीर डेम के सही आंकड़े तक नहीं बता सकता, वह डेम के पानी की सुरक्षा क्या करता होगा। यह साबित हुआ है विभाग के एक प्रेसनोट से। इसमें 2 अक्टूबर की स्थिति में गंभीर डेम में 2273 एमसीएफटी जल संग्रहित बताया गया है, जबकि डेम की क्षमता 2250 है।



भास्कर ने जब गंभीर डेम कंट्रोल रूम से वास्तविक स्थिति जानी तो मौजूद रिकॉर्ड के मुताबिक 2 अक्टूबर को 2071 और 3 अक्टूबर को 2054 एमसीएफटी पानी था। विभाग के अधीक्षण यंत्री के.के. सोनगरिया द्वारा जारी इस प्रेसनोट की हकीकत जानने के लिए जब उन्हें फोन किया गया तो वे उपलब्ध नहीं हो सके।

 
 


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