1. बच्चों के साथ समय व्यतीत करने के लिए सप्ताह का एक रूटीन बनाएं। इसके लिए सुबह या शाम का समय चुनें। इस खास समय में बच्चों के लिए कुछ स्पेशल प्रोग्राम बनाएं चाहे वह आइसक्रीम खाने का प्रोग्राम ही क्यों न हो। 2. बच्चों के दोस्तों तथा उनके परिवार की पूरी जानकारी रखें, ऐसा करने से बच्च अपने दोस्तों की बातें भी आपसे शेयर करेगा। 3. बच्चों को बस स्टॉप पर छोड़ने या लेने जाने का नियम बनाएं। अगर दफ्तर की वजह से लेने न जा पाएं तो छोड़ने तो जा ही सकते हैं। 4. खाना साथ खाएं, डायनिंग टेबल पर ऐसी बहुत सी बातें होती हैं जों संबंधों को बेहतर बनाने का काम करती हैं। 5. अच्छे श्रोता बनें तथा बच्चे को प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। कोई गलत प्रश्न पूछने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त न करें बल्कि ऐसे प्रश्नों पर विचार विमर्श करें। ऐसे में बच्च आपसे कुछ भी पूछने पर सहज महसूस करेगा। इस तरह के बच्चे अभिभावकों से कुछ छुपाते नहीं हैं। 6. बच्चे से आप जैसा व्यवहार चाहते हैं, पहले उस तरह का व्यवहार रोजमर्रा की जिंदगी में प्रदर्शित करें। 7. बच्चे से गलती हुई नहीं कि आप उसे डांटने लगते हैं, इससे पहले खुद अपने व्यवहार का भी आकलन करें। 8. अच्छा काम या पढ़ाई करने पर उसे समय-समय पर पुरस्कृत तथा प्रोत्साहित करें, इसी तरह मदद करने पर उनका आभार जरूर मानें। 9. बच्चों के प्रति कभी बहुत कठोर रुख न रखें, न ही उन्हें डराएं। कुछ अभिभावक, ‘हम चले जाएंगे’, ‘तुम्हें अकेले रहना पड़ेगा’ जैसी बातें करके बच्चे को काबू में करना चाहते हैं। लेकिन होता इसका उलटा है, बच्चे का मनोबल इससे कम ही होता है।
तेजी से बदलते माहौल में बच्चों की परवरिश एक बड़ी चुनौती बन गई है। क्या करें कि बच्चे को विकास के लिए संतुलित एवं स्वस्थ माहौल मिले, वहीं उसे व्यवहार संबंधी समस्या भी न हो।