जोधपुर. परंपरा और संस्कृति के शहर में शरद पूर्णिमा उत्सव रविवार को हर्षोल्लास से मनाया गया। मंदिरों में दिन भर पूजा-अर्चना और आराधना का दौर चला। चांदनी में नहाकर अमृत बनी खीर का भगवान को भोग लगाया गया और घर घर में खीर का प्रसाद ग्रहण किया गया।
इस दिन सफेद वस्त्र धारण किए गए। सफेद वस्तुओं का अधिकाधिक उपयोग किया गया। भोजन में भी स्वेत व्यंजन शामिल किए गए।काल गणना के अनुसार शरद पूर्णिमा को वर्ष का मध्यकाल माना गया है। इसी दिन शीत ऋतु का आगाज माना गया है। ज्योतिषियों के मुताबिक इस दिन महालक्ष्मी रात्रि में भ्रमण के लिए निकलती है। जो पुरुष जागता हुआ महालक्ष्मी का चिंतन करता है, उस पर वह प्रसन्न होती है और धन धान्य से परिपूर्ण करती है।