जोधपुर. अक्टूबर में पड़ रही गर्मी मौसमी बीमारियों में इजाफा कर रही है। शहर के तीनों प्रमुख अस्पतालों में करीब 25—30 फीसदी बुखार से पीड़ित पहुंच रहे हैं। इनमें इंफ्लुएंजा का असर होने से सामान्यत: तीन से पांच दिन में उतर जाने वाला बुखार पंद्रह दिन में ठीक हो रहा है। इसमें एंटीबायोटिक्स भी काम नहीं कर रही है।
डॉक्टर्स का मानना है कि पहली बार के बुखार के साथ शरीर में प्रविष्ट इंफ्लुएंजा वायरस का असर पांच से दस दिन तक रहता है। आम तौर पर रोगी बुखार ठीक होने पर दवाई लेना बंद कर देता है जिससे दुबारा बुखार आ जाता है। ऐसे मरीज सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में आ रहे हैं। इसके अलावा वायरल में प्लेटलेट्स कम होने के भी मामले सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि सिनसियल व पैरा इंफ्लुएंजा वायरस के लिए 25 से 40 डिग्री के तापमान उपयुक्त हैं। ऐसे में यदि थोड़ी सी नमी मिलते ही यह फैलने लगता है। इसका सर्वाधिक असर गले व फेंफड़ों पर होता है। हालांकि अस्पतालों में मलेरिया के मरीज कभी कभार ही आ रहे हैं।